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    अनंत कुमार : UN में कन्नड में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति थे, संस्कृति में थी मजबूत आस्था

    अनंत कुमार : UN में कन्नड में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति थे, संस्कृति में थी मजबूत आस्था

    मल्टीमीडिया डेस्क। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार का रविवार रात डेढ़ बजे बेंगलुरु में निधन हो गया है। अनंत कुमार लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। 59 साल के अनंत कुमार का पहले लंदन और न्यूयॉर्क में इलाज चला और 20 अक्टूबर को ही उन्हें बेंगलुरु लाकर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया था।

    अनंत कुमार का बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था और पिछले कुछ दिनों से वो वेंटीलेटर पर थे। जिस वक्त उन्होंने अंतिम सांस ली उस वक्त उनके पास उनकी पत्नी और बच्चे मौजूद थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत विभिन्न दलों के तमाम बड़े नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।

    केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने आपातकाल के खिलाफ 1975 से 1977 तक चले जेपी मूवमेंट में भाग लिया था। इसके लिए उन्हें 40 दिनो के लिए जेल में डाल दिया गया था। वह बेंगलुरू में एयरोस्पेस म्यूजियम सोसाइटी के फाउंडर प्रेसिडेंट भी हैं।

    अनंत कुमार राष्ट्रवाद और अपनी संस्कृति में मजबूत आस्था रखने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में कन्नड़ भाषा में बोलने वाले वह पहले व्यक्ति थे और ऐसा करके उन्होंने इतिहास रच दिया था। वह कई सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी शामिल रहे।

    छात्र जीवन से आ गए थे राजनीति में

    अनंत कुमार 1982 से 1985 तक कर्नाटक में एबीवीपी के सचिव थे। उसके बाद वह एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव बने। छात्र जीवन में ही उन्होंने दिखा दिया था कि उनमें प्रबंधकीय योग्यताएं हैं। वह लगातार राज्य के प्रभावशाली छात्र नेता के रूप मे उभरते जा रहे थे। राजनीति मे बड़ा कदम उठाते हुए उन्होंने साल 1987 में भाजपा से जुड़ने का फैसला किया।

    पार्टी के कार्यों के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता ने उन्हें पार्टी के युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के पद तक पहुंचा दिया। अंत में वह 1995 में पार्टी के महासचिव बने। अगले वर्ष उन्हें बेंगलुरू दक्षिण से लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट दिया गया। उन्होंने चुनाव जीते और उसके बाद कुमार का संसदीय करियर लगातार आगे ही बढ़ता गया।

    • 1995 से 1998 तक वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव थे और साल 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लोकसभा सांसद चुने गए।
    • 1996 में वह सलाहकार समिति, उद्योग मंत्रालय और रेल मंत्रालय में स्थायी समिति के सदस्य थे।
    • 1998 में कुमार को नागरिक उड्डयन मंत्री कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने मंत्रालयों में विभिन्न पदों मिल गए थे।
    • 2007 में उन्हें वित्त समिति के अध्यक्ष और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था।
    • वह विदेश मामलों पर समिति के अध्यक्ष बने। मई 2014 में उन्होंने रसायन और उर्वरक मंत्री के रूप में शपथ ली।

    अटल से लेकर मोदी तक, सबके करीबी रहे

    पार्टी के वफादार अनंत कुमार को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री नियुक्त किया गया था। एनडीए के सत्ता में रहने के दौरान उन्हें मंत्रालयों में कई अन्य पदों पर भी काम करने का मौका मिला। उन्होंने पर्यटन, खेल और युवा मामलों, संस्कृति, शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन जैसे विभिन्न मंत्रालयों में अपनी सेवा दी। अब मोदी की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्हें लंबा और अच्छा कार्यकाल मिल रहा था।

    मजबूत राजनीतिक झुकाव होने की वजह से अनंत कुमार हमेशा ही पार्टी के प्रमुखों के करीब रहे फिर चाहें वह लाल कृष्ण आडवाणी हों, अटल बिहारी वाजपेयी हों या वर्तमान में पीएम नरेंद्र मोदी हों। वह हमेशा आडवाणी के अच्छे और बुरे दौर में उनके पीछे खड़े रहे। मोहम्मद अली जिन्ना को ‘धर्मनिरपेक्ष’ कहने के बाद जब आडवाणई को आरएसएस के क्रोध का सामना करना पड़ा, तो आडवाणी के सलाहकार की जिम्मेदारी छोड़ने से अनंत कुमार ने इंकार कर दिया।

    येदियुरप्पा को बाहर निकलवाया

    कहा जाता है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को पार्टी से बाहर निकालने में भी अनंत कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी। साल 2010 में येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद कुमार ने उनके पद हासिल करने की अपने स्तर पर पूरी कोशिश की। हालांकि, वह केंद्र को मनाने में नाकाम रहे। बेंगलुरू दक्षिण से छह बार चुनाव जीतने के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग कल्याण और लोगों के विकास के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनकी प्रशंसा करते हैं। उन्हें आम आदमी की आवाज के रूप में माना जाता है।

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