Tuesday , 25 September 2018
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    आर्थिक मोर्चे पर राहत, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 11 माह के सबसे निचले स्तर पर

    आर्थिक मोर्चे पर राहत, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 11 माह के सबसे निचले स्तर पर

    नई दिल्ली। पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहे रुपये को थामने की चुनौती का सामना कर रही सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत की खबर है। दलहन और सब्जियों सहित कई खाद्य वस्तुओं की कीमत में कमी आने से अगस्त में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.69 प्रतिशत रह गयी है जो बीते 11 महीने में न्यूनतम है। वहीं मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन की बदौलत औद्योगिक उत्पादन में उछाल जारी रहा।

    जुलाई में आइआइपी में 6.6 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसी तरह अगस्त में निर्यात 19.21 प्रतिशत वृद्धि के साथ 27.84 अरब डॉलर हो गया है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते के अंत में अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लेंगे।

    इस बैठक में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन और चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। महंगाई, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन दिखाने वाले ये ताजा आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरते हुए बुधवार को अब तक के न्यूनतम 72.91 रुपये प्रति डॉलर के आंकड़े को छू गया है। वहीं कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते देश पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी हैं।

    केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बुधवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि खुदरा महंगाई दर अगस्त में घटकर 3.69 प्रतिशत हो गयी है जो 11 माह का न्यूनतम स्तर है। खुदरा महंगाई दर घटने की वजह सब्जियों सहित खाद्य वस्तुओं की कीमत में गिरावट आना है। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 4.17 प्रतिशत तथा पिछले साल अगस्त में 3.28 प्रतिशत थी।

    गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत (दो फीसद कम या ज्यादा) पर रखने का लक्ष्य रखा है। हालांकि पिछले साल नवंबर से यह चार प्रतिशत से ऊपर बनी हुई थी। इधर, मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन और कैपिटल गुड्स तथा कंज्यूमर गुड्स में वृद्धि से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आइआइपी जुलाई में 6.6 प्रतिशत पर रहा। आइआइपी जून में 6.8 प्रतिशत तथा पिछले साल जुलाई में एक प्रतिशत बढ़ा था।

    इस साल जुलाई में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में सात प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि पिछले साल समान महीने में इसमें 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी थी। इसी तरह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में जुलाई में 14.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि साल भर पहले जुलाई माह में इसमें 2.4 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।

    इसी तरह कैपिटल गुड्स में भी पिछले साल की 1.1 प्रतिशत गिरावट के मुकाबले इस साल तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वैसे चालू वित्त वर्ष में आइआइपी में 5.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि पिछले साल समान अवधि में इसमें 1.7 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।

    घरेलू मोर्चे के साथ-साथ बाहरी मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था के लिए सुखद खबर है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस साल अगस्त में भारत का निर्यात 19.21 प्रतिशत वृद्धि के साथ 27.84 अरब डॉलर हो गया है। अगर पेट्रोलियम उत्पादों को अलग रखकर देखें तो निर्यात में 17.43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    जहां तक आयात का सवाल है तो अगस्त में कच्चे तेल के भाव बढ़ने के चलते देश के आयात में 25.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 45.24 अरब डॉलर पहुंच गया है। इस तरह अगस्त में व्यापार घाटा 17.4 अरब डॉलर रहा है। गौरतलब है कि जुलाई में व्यापार घाटा पांच साल के रिकॉर्ड स्तर 18.02 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। वैसे चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अगस्त की अवधि में निर्यात में 16.13 प्रतिशत और आयात में 17.34 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

     

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