Wednesday , 20 February 2019
पाठक संख्याhit counter
    BREAKING NEWS
    आर्मी – डे / 6 दिन हम बर्फ में सुरंग बनाते रहे, सातवें दिन केबल की डोर दिखी तो उम्मीद बंधी

    आर्मी – डे / 6 दिन हम बर्फ में सुरंग बनाते रहे, सातवें दिन केबल की डोर दिखी तो उम्मीद बंधी

    भोपाल .  सेना दिवस (आर्मी-डे), यानी स्वतंत्रता के बाद सेना के भारतीयकरण का दिन। आज ही के दिन 71 साल पहले 15 जनवरी 1949 को केएम करियप्पा को भारतीय थल सेना का पहला लेफ्टिनेंट जनरल घोषित किया गया था।

    इसी दिन से ‘ब्रिटिश इंडियन आर्मी’ से ब्रिटिश शब्द हमेशा के लिए हट गया और उसे ‘इंडियन आर्मी’ कहा जाने लगा। इससे पहले ब्रिटिश राज के वक्त भारतीय सेना के शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर थे। सेना दिवस के अवसर पर भास्कर अपने पाठकों को भोपाल की धरती पर जन्मे सरहद के उन योद्धाओं से रूबरू करा रहा है, जिन्होंने शौर्य, साहस, पराक्रम एवं बलिदान की कई परिभाषाएं गढ़ी हैं।

    बात फरवरी 2016 की है। मैं लेह-लद्दाख में एविएशन विंग में पोस्टेड था। 3 फरवरी की सुबह हमें ऑपरेशन ‘सोनम’ का फरमान आया। बताया गया कि सोनम के पास हिम स्खलन में सेना के 10 जवान दब गए हैं। हम मिशन के लिए रवाना हुए। माइनस 35 डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान के बीच एक मिनट भी खड़ा रहना मुश्किल था। आसपास कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। विजिबिलिटी जीरो थी। हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेलीपैड बनाना भी मुश्किल था। ऐसे हालातों में हम लगातार पांच दिन तक सर्च के लिए जरूरी सामान स्नो कटर, खोजी कुत्ते और अन्य उपकरण पहुंचाते रहे। पांच दिन बीत गए थे, अब तक हमें कुछ भी पता नहीं चल रहा था। हमारे साथी 40 फीट गहरी बर्फ की चादर के बीच किस हाल में होंगे, यह सोचकर भी सिहर जाते थे। फिर भी ऑपरेशन सोनम जारी था। हिम स्खलन एक वर्ग किमी में हुआ था। 40 फीट गहरी बर्फ की चादर को भेदकर अपने साथियों का पता लगाना आसान नहीं था। छह दिन बाद हमारी टीम को बर्फ के भीतर एक टेलीफोन की केबल नजर आई। इसके बाद फिर तीन दिन और लगे। 9 साथियों की सांसें उखड़ चुकी थीं, लेकिन हनुमंथप्पा की सांसें चल रही थीं। उसकी चलती सांसों से हमें भी ताकत मिली। हम उसे सोनम से सियाचीन बेस लेकर आए। फिर हनुमंथप्पा को दिल्ली एम्स लेकर गए। हालांकि यह खुशी थोड़े समय ही रही। हनुमंथप्पा भी हमें छोड़ गए। ईदगाह हिल्स के संजय जून 1993 को एनडीए पहुंचे और 1997 में सेना में ज्वाइन की। 26 मई 2018 को संजय ने सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। कहते हैं कि सेना की जिंदगी में ऑपरेशन सोनम उन्हें मरते दम तक याद रहेगा। संजय को इसके लिए सेना मेडल भी मिला है।

    About jap24news