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    एलियन का नहीं था चिली में  मिला 6 इंच का कंकाल

    एलियन का नहीं था चिली में मिला 6 इंच का कंकाल

    न्यूयॉर्क:  चिली में एक खुदाई के दौरान मिला छह इंच का बेहद छोटा कंकाल एलियन का नहीं है। इस पर अब तक हुए तमाम अध्ययनों के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। विशेषज्ञ अब इस कंकाल पर नए सिरे से अध्ययन करेंगे। हड्डियों के डीएनए अध्ययन से पता चलता है कि अवशेष वास्तव में इनसान के हैं। यह कंकाल 2003 में चिली के अटाकामा में मिला था। अध्ययन के दौरान पता चला था कि इस कंकाल में सिर्फ 10 पसलियां हैं।

    कई अध्ययनों के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह एक लड़की का कंकाल है जो बौनी थी। चिली में मिले रहस्यमयी छह इंच के कंकाल को एलियन का बताने के दावों का खंडन करते हुए वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन कर पाया है कि यह एक कन्या भ्रूण का कंकाल है, जिसे हड्डियों का दुर्लभ विकार था। चिली के अटाकामा रेगिस्तान के निर्जन कस्बे में एक दशक पहले यह कंकाल बरामद हुआ था, जिसे अटा नाम दिया गया था। स्पेन में एक स्थायी घर मिलने के बाद अटा की ओर लोगों ने ध्यान दिया।

    चपटी और धंसी हुई खोपड़ी व आंखों वाले मात्र छह इंच के इस कंकाल को लेकर इंटरनेट पर इसे दूसरी दुनिया के जीव बताने की खबरों ने जोर पकड़ रहा था, लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिना शक, यह मानव कंकाल है। ‘जीनोम रिसर्च’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह गंभीर आनुवंशिक उत्परिवर्तनों से पीड़ित एक मानव (कन्या) का कंकाल है। शोध में पता चला है कि यह भ्रूण हड्डियों के गंभीर रोग से पीड़ित था।

    इसकी आनुवंशिक प्रक्रिया को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने अटा की पसलियों से डीएनए का एक छोटा नमूना निकाला और संपूर्ण जीनोम का अनुक्रम बिठा इसे समझने का प्रयास किया। कंकाल संभवता 40 साल पुराना था, इसलिए इसका डीएनए आधुनिक और अपेक्षाकृत काफी अच्छी स्थिति में था।संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण से एकत्र आंकड़ों से पता चला कि अटा की आण्विक संरचना मानव जीनोम के समान है।

    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया-सान फ्रांसिस्को से इस अध्ययन के सह-लेखक अतुल बटे ने कहा, ‘मुझे इस अध्ययन से वास्तव में यह चीज सीखने को मिली कि हमें एक जीन मिल जाने पर जांच बंद नहीं करनी चाहिए। यहां कई चीजें गलत हो सकती हैं और यह पूरी तरह से समझने योग्य है, खासकर जब हम जीन थेरेपी के करीब और करीब जाते हैं।’

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