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    कच्चे तेल के दामों में 2014 के बाद सबसे बड़ी गिरावट

    कच्चे तेल के दामों में 2014 के बाद सबसे बड़ी गिरावट

    लंदन/मुंबई। कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट कू्रड की कीमत घटकर 65.02 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई। इस वजह से रुपए को सपोर्ट मिला और ट्रेडिंग के दौरान एक यूएस डॉलर की वैल्यू घटकर 72 रुपए से नीचे आ गई।विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में अभी और गिरावट आएगी, जिससे रुपए को सपोर्ट मिलेगा।

    आगामी एक महीने में रुपया 70 प्रति डॉलर तक मजबूत हो सकता है। इस साल अक्टूबर के बाद अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है, जो 2014 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने की वजह से घरेलू वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमत 7.5 प्रतिशत घटकर 65.47 डॉलर प्रति बैरल रह गई।

    मंगलवार के कारोबार में कच्चा तेल 65 डॉलर से भी नीचे चला गया। अमेरिकी लाइट कू्रड डबल्यूटीआई भी बड़ी गिरावट के साथ 55.30 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास आ गया।अमेरिका में बढ़ा उत्पादनपिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल की इंवेंट्री 78 लाख बैरल बढ़कर 4.32 करोड़ बैरल हो गया। वहां 7 प्रमुख शेल बेसिन का प्रोडक्शन दिसंबर में बढ़कर रिकॉर्ड 79.4 लाख बैरल रोजाना होने की संभावना है।

    अमेरिकी ऊर्जा एजेंसी ईआईए ने कहा है कि अमेरिका का तेल उत्पादन 116 लाख बैरल रोजाना हो सकता है और इस तरह अमेरिका रूस और सउदी अरब के बाद कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक बन सकता है। बावजूद इसके अमेरिका ने सऊदी अरब के नेतृत्व वाले पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक देशों को आपूर्ति न घटाने को कहा है।

    रुपए को सपोर्ट

    केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति है, जबकि मांग कमजोर पड़ गई है। ईरान पर प्रतिबंधों का जो तनाव था, वह अब कम हो गया है। अमेरिका ने 8 बड़े तेल आयातक देशों को ईरान से आयात करने की छूट दे दी है। अमेरिका में कच्चे तेल की इन्वेंट्री भी बढ़ी हुई है। सउदी अरब समेत अन्य बड़े ओपेक देश भी सप्लाई घटाने के मूड में नहीं हैं। दूसरी ओर साल के अंत में बड़े निवेशक अपना पोर्टफोलियो फिर से तैयार करते हैं, ऐसे में कच्चे तेल की बिकवाली बढ़ सकती है। इन वजहों से कीमत पर दबाव बने रहने की उम्मीद है।

    ओपेक में आपूर्ति घटाने पर चर्चा से मामूली रिकवरी

    बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की रिवकरी हुई। वजह यह रही कि ओपेक के सदस्य देश नहीं चाहते कि कीमतों में आगे और गिरावट आए। इसके लिए उन्होंने अगले महीने से उत्पादन रोजाना 14 लाख बैरल घटाने पर चर्चा की। इसके चलते ब्रेंट कू्रड की कीमत 36 सेंट बढ़कर 65.83 डॉलर प्रति बैरल हो गया। अमेरिकी तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत भी 6 सेंट बढ़कर 55.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

     

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