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    कर्नाटक में भाजपा बहुमत के करीब; कांग्रेस को पिछली बार से ज्यादा वोट मिले, फिर भी 42% सीटें गंवाई

    कर्नाटक में भाजपा बहुमत के करीब; कांग्रेस को पिछली बार से ज्यादा वोट मिले, फिर भी 42% सीटें गंवाई

    नई दिल्ली.कर्नाटक विधानसभा की 224 में से 222 सीटों पर हुए चुनावों के रुझानों में भाजपा को बहुमत मिल गया है। वह 107 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 74, जेडीएस को 39 और अन्य 2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। मतगणना के शुरुआती आधे घंटे में कांग्रेस ने बढ़त बनाई। इसके बाद एक घंटे तक उसकी भाजपा से कड़ी टक्कर देखने को मिली। लेकिन साढ़े नौ बजे के बाद भाजपा आगे निकलकर बहुमत तक पहुंच गई। राज्य में भाजपा से ज्यादा वोट शेयर हासिल करने के बाद भी कांग्रेस उसे शिकस्त नहीं दे पाई। बल्कि, सत्ताधारी पार्टी की सीटें पिछली बार से आधी रह गईं। कर्नाटक हारने के बाद कांग्रेस की सरकार पंजाब, मिजोरम और पुडुचेरी में बची है। वहीं, भाजपा अब 31 राज्यों में से 21 में सत्ता में पहुंची है।

    पिछले चुनाव की तरह, वोट प्रतिशत से बढ़ने से बदल गई सरकार

    – कर्नाटक में 12 मई को 224 सीटों में से 222 पर एक फेज में चुनाव हुए थे। राज्य के गठन के 46 साल बाद इस बार सबसे ज्यादा 72.13% वोटिंग हुई। 2008 (65.1%) के मुकाबले 2013 (71.45%) में करीब 6% वोटिंग ज्यादा हुई थी। तब सरकार बदल गई थी और भाजपा ने पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इस बार भी ऐसा ही हुआ। कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

    – 2 सीटों पर चुनाव टाले गए: राजराजेश्वरी, जयनगर

    कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा, लेकिन सीटें आधी हो गईं

    – भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट शेयर में बढ़ोत्तरी हुई। कांग्रेस के वोट शेयर में 1.3% के इजाफा के बाद भी सीटें 122 से घटकर करीब आधी रह गईंं।

    पार्टी 2018 2013 अंतर
    कांग्रेस 38.0% 36.6% + 1.4%
    भाजपा 36.7% 19.9% +16.8%
    जेडीएस 17.7% 20.2% -2.5%
    अन्य 7.2% 23.3% -16.1%

    भाजपा की सीटें दोगुनी हुईं

    पार्टी 2018 के रुझान 2013 अंतर
    कांग्रेस 73 122 -49
    भाजपा 107 40 +67
    जेडीएस 41 40 +1
    अन्य 02 22 -18

    2014 लोकसभा चुनाव में स्थिति:

    पार्टी 2014 में लोकसभा सीट 2014 में विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त वोट शेयर
    कांग्रेस 09 75 41.2%
    जेडीएस 02 12 11.1%
    भाजपा 17 134 43.4%
    अन्य 00 3 4.6%

    इन 3 वजहों से भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई

    1) येदियुरप्पा ने बढ़ाया भाजपा का वोट शेयर
    – कर्नाटक में भाजपा ने जब पहली बार अपने बूते सरकार बनाई थी तो 2008 में कमान येदियुरप्पा को सौंपी थी। लेकिन बाद में खनन घोटालों में आरोपों के चलते येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने कर्नाटक जनता पक्ष नाम से अलग पार्टी बना ली और 2013 का चुनाव अलग लड़ा।
    – 2013 के चुनाव में भाजपा के हाथ से सत्ता निकल गई। येदियुरप्पा की पार्टी को 9.8% वोट शेयर के साथ 6 सीटें मिलीं। माना गया कि इससे भाजपा को नुकसान हुआ। उसका वोट शेयर सिर्फ 19.9% रहा और वह 40 सीटें ही हासिल कर सकी।

    – इस बार येदियुरप्पा की भाजपा में वापसी हुई। उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो पार्टी का वोट शेयर 35% से ज्यादा हो गया। यानी इसमें येदियुरप्पा की पार्टी का वोट शेयर तो जुड़ा ही भाजपा ने अपने बूते भी इसमें इजाफा किया।

    2) सिद्धारमैया का लिंगायत कार्ड उलटा पड़ा

    – सिद्धारमैया ने चुनाव की तारीखों का एलान होने से ठीक पहले राज्य में लिंगायत कार्ड खेला। इस समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया का यह दांव उलटा पड़ा। राज्य में लिंगायतों की आबादी 17% से घटाकर 9% मानी गई। इस कदम से वोक्कालिगा समुदाय और लिंगायतों के एक धड़े वीराशैव में भी नाराजगी थी। इससे उनका झुकाव भाजपा की तरफ बढ़ा।

    3) मोदी ने 21 रैलियों से 115 सीटों को कवर किया
    – मोदी ने इस चुनाव में 21 रैलियां कीं। कर्नाटक में किसी प्रधानमंत्री की सबसे ज्यादा रैलियां थीं। दो बार नमो एप से मुखातिब हुए। करीब 29 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए।
    – मोदी ने 20 करोड़ आबादी और 403 सीट वाले यूपी में 24 रैलियां की थीं। कर्नाटक की आबादी 6.4 करोड़ और 224 सीटें हैं। मोदी ने सबसे अधिक 34 रैलियां गुजरात में और 31 बिहार चुनाव में की थीं।

    – भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 27 रैलियां और 26 रोड शो किए। करीब 50 हजार किलोमीटर की यात्रा की। 40 केंद्रीय मंत्री, 500 सांसद-विधायक और 10 मुख्यमंत्रियों ने कर्नाटक में प्रचार किया। भाजपा नेताओं ने 50 से ज्यादा रोड शो किए। 400 से ज्यादा रैलियां कीं।

    राहुल की मोदी के बराबर रैलियां फिर भी कांग्रेस की सीटें कम हुईं

    – कर्नाटक चुनाव में राहुल ने 20 रैलियां कीं और 40 रोड शो-नुक्कड़ सभाएं कीं। राहुल ने मोदी से दो गुना अधिक दूरी तय की। 55 हजार किमी की यात्रा की। इसके बावजूद कांग्रेस की सीटें पिछले बार (122) से घटकर आधे पर आ गईं।

    – इससे पहले, राहुल ने यूपी चुनाव से पहले खाट पर चर्चा की थी। पूरे राज्य का दौरा किया था। 20 रैलियां और 8 रोड शो किए थे। यूपी में सोनिया गांधी ने प्रचार नहीं किया था, जबकि कर्नाटक में उन्हें प्रचार के लिए उतरना पड़ा।

    मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 22 राज्यों में चुनाव हुए, भाजपा ने 14 में सरकार बनाई

    2014: महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर

    2015: दिल्ली, बिहार

    2016: असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी
    2017: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, गुजरात, हिमाचल
    2018: त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, कर्नाटक

    14 राज्य जिनमें भाजपा ने सरकार बनाई: महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, गुजरात, हिमाचल, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय। (कर्नाटक में सरकार बनने के बाद यह संख्या 15 हो जाएगी।)

    – बिहार में एनडीए के सहयोगी दल जदयू की सरकार है। हालांकि, यहां भाजपा हारी थी। डेढ़ साल बाद उसका जदयू से गठबंधन हुआ और सत्ता में आई।

    64 लोकसभा सीटों वाले 4 राज्यों में इस साल होंगे चुनाव
    1) मिजोरम: 1 लोकसभा सीट
    2) राजस्थान: 25 लोकसभा सीटें
    3) छत्तीसगढ़: 11 लोकसभा सीटें
    4) मध्य प्रदेश:27 लोकसभा सीटें

    पांच बड़ी सीटें जिन पर मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे

    – कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी और बादामी सीट से चुनाव लड़े।

    – भाजप के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा ने शिकारीपुरा से मैदान में थे।

    – वहीं, जेडीएस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एचडी कुमारस्वामी रामनगर और चन्नापाटना सीट से चुनाव लड़े।

     

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