Monday , 16 July 2018
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    कांपा में पीलिया से 15 दिन में दो मौतें, इलाके में 150 से ज्यादा मरीज, सिर्फ एक दिन हेल्थ कैंप

    कांपा में पीलिया से 15 दिन में दो मौतें, इलाके में 150 से ज्यादा मरीज, सिर्फ एक दिन हेल्थ कैंप

    रायपुर.राजधानी में पीलिया से पिछले पंद्रह दिन में तीन मौतों के बाद प्रशासन से नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग तक, तमाम सरकारी एजेंसियां ने बैठकों और कमेटियों के जरिए जमकर धमाचौकड़ी मचाई है। पीलिया पर काबू के दावे भी किए जाने लगे हैं, लेकिन भास्कर टीम ने मौके पर पड़ताल की तो कांपा जैसा इलाके में पाइप लाइनें अब तक भयंकर गंदगी में डूबी हैं, जहां 2 महिलाओं की पीलिया से जान गई और 150 से ज्यादा बीमार हैं।

    नगर निगम का सीधा सा तर्क

    गुढ़ियारी के गोपालनगर इलाके में सप्लाई लाइनें नाली से हटाना तो दूर, सफाई के इंतजाम भी पहले जैसे ही हैं। वहां भी एक महिला की मौत हुई है। नगर निगम ने सीधा तर्क दिया है कि पाइप लाइनें बदलने के लिए पैसे नहीं हैं, शासन को प्रस्ताव भेजा है। निगम और स्वास्थ्य विभाग ने कांपा में एक दिन हेल्थ कैंप से क्लोरीन की गोलियां बांटकर काम खत्म कर लिया है।

    लोगों को दी नसीहत

    शहर में सबसे पहले पीलिया की शिकायत कांपा, मोवा और आसपास है। यहां हुई मौतों के बाद शासन-प्रशासन से लेकर निगम के महापौर और अफसरों ने इन इलाकों में दौरा किया। फौरी कार्रवाई के नाम पर लोगों को पानी में क्लोरिन की गोलियां डालने और पानी उबाल कर पीने की नसीहत दे दी। कांपा में पहली मौत के 14 दिन बाद मंगलवार को भास्कर टीम ने कुछ प्रभावित इलाकों का मुआयना किया। वहां हालात बिलकुल नहीं बदले हैं। लोधीपारा से शंकर नगर की ओर जाने वाली सड़क पर पाइपलाइनें अब भी नाले में डूबी हैं। लोधीपारा चौक के पास, जो इलाका सबको नजर आता है, वहां चार-पांच लाइनें हटाई गई हैं। लेकिन भीतर जहां पीलिया फैला है, ज्यादातर पाइप नालियों में ही हैं।

    नालियों से गुजर रही पानी की पाइप लाइनें

    यही नहीं, शहर की पुरानी बसाहट और पीलिया की शिकायत वाले सदर बाजार, गोलबाजार और चूड़ी लाइन में तमाम लाइनें नालियों से गुजर रही हैं। सदर बाजार में कमासी पारा के आसपास कुछ जगह पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत की गई, लेकिन इन्हें बदला नहीं गया। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि अफसर सिर्फ छोटी-मोटी टूटफूट को ही रिपेयर करवा रहे हैं। कमासीपारा में सीवर लाइन चोक है और पानी घरों तक पहुंच रहा है। तेलीपारा में 14 साल के बच्चे को पीलिया की वजह से अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    बीएसयूपी बस्तियों का हाल बुरा

    निगम के चंगोराभाठा, भाठागांव, सरोना आदि जगहों पर बनी बीएसयूपी की कालोनियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। चंगोराभाठा बीएसयूपी कालोनी में पीलिया की शिकायत के बाद निगम ने यहां कुछ जगहों पर पाइपलाइन को बदला। लेकिन घरों तक पहुंच रहा पाइपलाइन अब भी कीचड़ और दलदल में फंसी हुई है। कालोनी की सीवरेज लाइन भी चोक है, जिससे पानी सतह पर फैलने लगा है। यहां से पाइपलाइन लोगों के घरों तक गई है।

    विपक्षी जनप्रतिनिधि भी खामोश
    शहर में इस समय पीलिया सबसे बड़ी समस्या बन गई है। शहर के ज्यादातर इलाके अभी पीलिया की चपेट में है। इसके बावजूद निगम के जनप्रतिनिधि खामोश बैठे हैं। निगम में विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर अब तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है। निगम के अफसर और जनप्रतिनिधियों की औपचारिक खानापूर्ति को लेकर विपक्ष ने भी अब तक ठोस रणनीति जाहिर नहीं की है।

    कहा तो है जोन अफसरों से
    जल विभाग के चेयरमैन नागभूषण राव यादव ने बताया कि जोन कमिश्नरों से कहा था कि अपने वार्डों में पाइप लाइनें नालियों से हटाएं। जहां ज्यादा असर है, उन्हें बदलें। ऐसा किया तो गया है। जर्जर लाइनें बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा है क्योंकि खर्च ज्यादा है।

    स्वस्थ रखने नहीं, स्मार्ट पर खर्च
    नगर निगम में स्मार्ट सिटी और सौंदर्यीकरण पर बेतहाशा खर्च किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण के अभी जितने प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उनका खर्च ही 10 करोड़ रुपए से अधिक है। दूसरी ओर, शहर की 50 किमी पाइपलाइनें बदलने के लिए निगम को 21 करोड़ रुपए चाहिए, ताकि लोगों की बीमारियों से रक्षा की जा सके। यह पैसे निगम के पास नहीं है, इसलिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अब यह प्रस्ताव वहीं लंबित है।

     

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