Tuesday , 25 September 2018
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    कांस्टेबल बनने के लिए एग्जाम रूम में स्टूडेंट, गैंग ने होटल से सॉल्व करवाया पेपर

    कांस्टेबल बनने के लिए एग्जाम रूम में स्टूडेंट, गैंग ने होटल से सॉल्व करवाया पेपर

    जयपुर। राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए पहली बार आयोजित हुई आॅनलाइन परीक्षा में नकलची गैंग ने सेंधमारी कर दी। इस हाईप्रोफाइल गैंग ने अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर शातिराना तरीके से नकल करवाई। खुद एक परीक्षा केंद्र के संचालक इस गैंग के मास्टरमाइंड बने जिन्होंने अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनको नकल करवाने का रातों-रात इंतजाम किया। इसी बीच इसकी भनक पुलिस मुख्यालय को लगी तब स्पेशल आॅपरेशन ग्रुप एसओजी की टीम सक्रिय हुई और इस शातिर गैंग के एक मास्टरमाइंड समेत छह सदस्यों को ​आज गिरफ्तार कर लिया। जानिए ​कैसे करवाई हाईटेक नकल …

    – एसओजी के आईजी दिनेश एमएन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी विकास मलिक (30) मालेगांव, महाराष्ट्र का रहने वाला है। वह सरस्वती इंफोटेक कंपनी का पार्टनर है। इसके अलावा अमोल महाजन (24) निवासी मालेगांव, आरोपी अभिमन्यु सिंह (25), आरोपी संजय छिकारा (25) आरोपी अंकित सहरावत (18) निवासी सोनीपत हरियाणा और आरोपी अमित जाट (21) है। इसके अलावा सरस्वती इंफोटेक इंस्टीट्यूट कंपनी के दो पार्टनर कपिल और मुख्त्यार फरार हो गए। उनकी तलाश में पुलिस टीमें भेजी गई हैं। वहीं, गैंग से संपर्क कर नकल करने वाले 12 अभ्यर्थियों को भी नामजद कर गिरफ्तारी की जाएगी।

    तीन महीने पहले ही शुरु किया था इंस्टीट्यूट, संचालक बने मास्टरमाइंड
    – आईजी दिनेश एमएन ने बताया कि सात मार्च से शुरू हुई इस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए राजस्थान के करीब 10 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें जयपुर के मालवीय नगर इलाके में अपेक्स सर्किल के पास स्थित सरस्वती इंफोटेक इंस्टीट्यूट को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। यह इंस्टीट्यूट करीब तीन महीने पहले ही बिल्डिंग किराए पर लेकर शुरू किया था। इससे पहले यह कंपनी दिल्ली में संचालित थी। इसके तीन पार्टनर होना सामने आया है। इनमें एक विकास मलिक, कपिल और मुख्त्यार है। इस इंस्टीट्यूट में करीब 300 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था है। पीएचक्यू ने परीक्षा आयोजित करवाने का ठेका एप्टेक कंपनी को दिया था। इसी कंपनी ने सरस्वती इंस्टीट्यूट को परीक्षा केंद्र के लिए चुना था।

    – डीआईजी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि कंपनी के तीनों पार्टनरों ने पहले परीक्षा केंद्र में आने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क किया। इनमें कुछ अभ्यर्थियों को नकल और परीक्षा पेपर बताने का आश्वासन देकर दो से चार लाख रुपयों में सौदा ​तय किया। पूछताछ में सामने आया कि इंस्टीट्यूट संचालकों ने हाईटेक नकल के लिए इंस्टीट्यूट के नजदीक एक गेस्ट हाउस में कमरे बुक करवाए। इसके बाद परीक्षा केंद्र में लगे कंप्यूटर सर्वर को वायरिंग कर इंस्टीट्यूट की छत पर लगे एंटीना से कनेक्ट कर दिया। वहीं, होटल की छत पर राउटर व अन्य उपकरण लगवाए। उन्होंने होटल में ही लेपटॉप व अन्य उपकरणों के साथ प्रश्न पत्र हल करने वाले एक्सपर्ट को बैठा दिया।

    इंस्टीट्यूट के परीक्षा हॉल में अभ्यर्थी, होटल से नकल का खेल

    – डीआईजी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि परीक्षा शुरू होने पर नकलची गैंग से संपर्क साधने वाला अभ्यर्थी सीट पर बैठकर ज्योंही अपना सर्वर शुरू करता। तभी एक टेक्नीकल कर्मचारी एक पेनड्राइव को सर्वर में लगाकर उसे हैक कर लेता। इससे वही स्क्रीन होटल में बैठे नकल करवाने वाले व्यक्ति के पास खुल जाती। वह वहीं बैठकर पेपर सॉल्व करता है जबकि अभ्यर्थी पेपर सॉल्व करने का नाटक करता है। इसी तरह इस गैंग ने अन्य अभ्यर्थियों को भी नकल करवाई। इसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय में तैनात आईजी कार्मिक संजीव नार्जरी को लगी। तब उन्होंने एसओजी के एडीजी उमेश मिश्रा को सूचना दी।

    – इसके बाद रविवार रात आईजी दिनेश एमएन, डीआईजी संजय श्रोत्रिय के निर्देशन में एडिशनल एसपी करन शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह शेखावत और ललित किशोर शर्मा के नेतृत्व में टीम गठित की गई जिन्होंने एप्टेक कंपनी के एक्सपर्ट के साथ मिलकर रातोंरात होटल व इंस्टीट्यूट बिल्डिंग की बारीकी से जांच की तो नकल का पर्दाफाश हो गया।

    परीक्षा केंद्र निरस्त किया

    – एडीजी राजीव शर्मा ने बताया कि पुलिस मुख्यालय ने अब इस परीक्षा केंद्र को निरस्त कर दिया है। यहां 13 से 17 मार्च तक चार हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा होनी थी जिन्हें अन्य केंद्रों पर परीक्षा दिलवाई जाएगी।

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