Monday , 16 July 2018
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    केमिकल अटैक के जवाब में यूएस, ब्रिटेन, फ्रांस का सीरिया पर हवाई हमला, रूस ने कहा- ट्रम्प मौजूदा दौर के हिटलर

    केमिकल अटैक के जवाब में यूएस, ब्रिटेन, फ्रांस का सीरिया पर हवाई हमला, रूस ने कहा- ट्रम्प मौजूदा दौर के हिटलर

    वॉशिंगटन.सीरिया में 7 अप्रैल को बेगुनाह लोगों पर किए गए रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया पर शुक्रवार रात मिसाइलों से हमला किया। इसमें फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, दमिश्क और होम्स में 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। सीरियाई के सरकारी टीवी ने दावा है कि उसने इनमें से 13 को मार गिराया। इस कार्रवाई में फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब है। वहीं, रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान और ट्रम्प को मौजूदा दौर का हिटलर बताया है। उसका कहना है कि वह इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

    नुकसान की अभी जानकारी नहीं- मैटिस

    – न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी जेम्स मैटिस ने बताया कि अब तक हमें नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, रूस ने कहा है कि इन हमलों में उसके किसी भी ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया है।

    – आरोप है कि असद सरकार ने पिछले हफ्ते पूर्वी घोउटा के डूमा में लोगों पर रासायनिक हमले किए थे। ट्रम्प ने पिछले दिनों इस पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    सीरिया की सड़कों पर बजाए जा रहे राष्ट्रगीत
    – दमिश्क की सड़कों पर लाउडस्पीकर पर राष्ट्रगान बजाते वाहन घूम रहे हैं।
    – सीरियाई राष्ट्रपति के ऑफिस से ट्वीट किया गया- अच्छे लोगों को अपमानित नहीं किया जाएगा।

    हमले क्यों किए गए?

    – ऐसा आरोप है कि पिछले हफ्ते 7 अप्रैल को सीरिया के पूर्वी घोउटा में विद्रोहियों के कब्जे वाले आखिरी शहर डूमा में हुए संदिग्ध रासायनिक हमले में 80 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। 1000 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। स्थानीय स्वयंसेवी संस्था ह्वाइट हेलमेट्स ने हमले के बाद की तस्वीरें पोस्ट की थीं।

    – सीरिया की बशर-अल-असद की सरकार ने इन खबरों को झूठा करार दिया था।

    दमिश्क, होम्स समेत 3 जगहों को निशाना बनाया
    – सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया।
    पहला: दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं।
    दूसरा: होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है।
    तीसरा: होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है।

    ट्रम्प ने कहा- ये शैतान का काम, ब्रिटेन बोला- कोई ऑप्शन नहीं था
    – डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा- “यह किसी इंसान की हरकत नहीं हो सकती है। यह एक शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई हरकत है। हमारे हवाई हमले सीधे तौर पर रूस की नाकामी का नतीजा हैं। रूस असद को रासायनिक हथियारों से दूर नहीं रख पाया। आज की रात की गई कार्रवाई का उद्देश्य रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाना है। जब तक उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता हर तरह की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।”

    – फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि रसायनिक हथियारों के हमले के बाद लाल लाइन पार की जा चुकी थी।

    – ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि सीरिया पर हमले के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

    रूस ने कहा- इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
    – रूस ने यूएस, ब्रिटेन और फ्रांस की इस कार्रवाई को राष्ट्रपति पुतिन का अपमान करार दिया है। रूस ने कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    पिछली बार से ज्यादा ताकतवर हमला
    – अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि इन हमलों में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की नौसेना और वायुसेना शामिल थीं। इसमें पिछले साल किए गए हमले से दोगुना गोला-बारूद का इस्तेमाल किया गया। तब 59 टॉमहॉक मिसाइल दागी गई थीं।
    – पिछले साल के हमले में 20 सीरियाई विमान नष्ट हो गए थे। अनुमान है कि यह सीरियाई एयरफोर्स के कुल विमानों का करीब 20% हिस्सा था।

    रूस-अमेरिका में टकराव बढ़ेगा, लेकिन वर्ल्ड वॉर के आसार नहीं
    – डूमा में रूस की डिफेंस कमेटी के डिप्टी हेड एलेक्जेंडर शेरिन ने कहा कि ट्रम्प को “हमारे दौर का हिटलर नंबर-2 कहा जा सकता है। दरअसल, आपने देखा कि उन्होंने वही वक्त चुना, जब हिटलर ने सोवियत यूनियन पर अटैक किया था।”
    – उन्होंने कहा, “नाजी सेनाओं ने 1941 में यूनाइटेड स्टेट ऑफ सोवियत रूस पर सुबह 4 बजे हमला किया था। शुक्रवार के हमलों का वक्त भी वही था।”

    रूस से 8 गुना है अमेरिका का रक्षा बजट

    – अमेरिका रक्षा पर 550 अरब डॉलर (करीब 36 लाख करोड़ रुपए) सालाना खर्च कराता है। वहीं, रूस सिर्फ 70 अरब डॉलर (करीब 4 लाख 56 हजार रुपए)। रूस के पास सिर्फ एक पुराना एयरक्राफ्ट कैरियर है, जबकि अमेरिका के पास 20 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

    इन हमलों में कौन किसके साथ?
    – ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन और यूएस की कार्रवाई के सपोर्ट में हैं। ये सभी असद के खिलाफ हैं।

    – रूस, ईरान और चीन सीरिया की असद सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं।

    सीरिया में 5 साल में 4 बार किया गया रासायनिक हमला
    – सीरिया में 2013 में पहली बार सीरियाई सेना ने पूर्वी घोउटा में राकेट से सरीन नर्व एजेंट छोड़ा था। इसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

    – सीरियाई सेना ने अप्रैल 2017 में खान शेखाउन में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था। इसमें 80 मारे गए थे। इस साल की शुरुआत में भी सीरिया सेना विद्रोहियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल किया था। फिर 7 अप्रैल को रासायनिक हमला किया।

    क्या है सीरिया का संकट?
    – 2011 में सीरिया में सिविल वॉर हुआ। कुछ मुट्ठीभर बच्चों की गिरफ्तारी से शुरू हुआ ये संघर्ष सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया के लिए अब तक का सबसे बड़ा ह्यूमन क्राइसिस बन चुका है। इसके बाद जुलाई 2011 में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए सीरियन आर्मी के अफसरों के एक ग्रुप ने सेना छोड़ फ्री सीरियन आर्मी का गठन किया।

    – दिसंबर 2011 से लेकर 2012 तक जगह-जगह सुसाइड बम ब्लास्ट हुए। इसके बाद अल कायदा के लीडर अयमान अल जवाहिरी ने सीरियाई लोगों से जिहाद के लिए आगे आने की अपील की। बीते दो साल में आईएस ने भी अपने आतंकी भेजने शुरू कर दिए।

    – 2015 में रूस ने बशर अल-असद को सपोर्ट कर दिया। असद के लिए सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) को रूस और ईरान सपोर्ट कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका पर आरोप है कि वह असद के खिलाफ विद्रोहियों की मदद कर रहा है।

    – प्रेसिडेंट बशर अल-असद के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों और संघर्ष में अब तक करीब 4 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

    कार्रवाई का समर्थन करता हूं: नाटो चीफ
    – नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टाेलेनबर्ग ने कहा, “मैं यूएस, यूके और फ्रांस की कार्रवाई का समर्थन करता हूं। इससे सरकार की आगे से सीरिया के लोगों पर रासायनिक हमले करने की क्षमता कम होगी।”

    ईरान ने कहा- कार्रवाई के नतीजे भुगतने होंगे
    – ईरानी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ”अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास रासायनिक हमले के कोई सबूत नहीं हैं। इन हमलों से जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाने का इंतजार किए बगैर ही हवाई हमले शुरू कर दिए। इस कार्रवाई के लिए उन्हें नतीजे भुगतने होंगे। यह साफतौर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।”

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