Tuesday , 13 November 2018
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    क्रिसमस डे आज : सैंटा क्लॉज  क्यों देते हैं उपहार….

    क्रिसमस डे आज : सैंटा क्लॉज क्यों देते हैं उपहार….

    आज क्रिसमस डे के मौके पर पुरे देश में उत्साह का माहौल है | हर शहर में तयारी पूरी हो गयी है |बच्चे से लेकर वृद्ध व्यक्तियों तक सब इसके जश्न में दुबे है | आज मान्यता है है की संत निकोलस यानि किन बच्चो के प्यारे सांता क्लोज उनको गिफ्ट भी देते है 25 दिसंबर को ईसाई समुदाय के लोग यीशू मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह का का जन्म नहीं हुआ था। कहा जाता है कि उनका जन्म अक्टूबर में हुआ था, लेकिन फिर भी ईसा मसीह का जन्मदिन मनाने के लिए इस दिन को चुना गया।| इस दिन की प्रमुखता देखते हुए ही ईसाई समुदाय ने इस दिन को ईशू के जन्मदिन के रुप में चुना। क्रिसमस से पहले ईस्टर का पर्व ईसाई समुदाय का प्रमुख त्योहार माना जाता था।
    इसलिए सेंटा को किया जाता है याद:

    सेंटा क्लॉज इस दिन बच्चों को गिफ्ट देते हैं। दरअसल, उनका पूरा नाम संत निकोलस था, जो जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में जन्मे थे। सेंटा के बचपन में ही उनके माता-पिता की मौत हो गई थी और सेंटा को सिर्फ जीसस पर ही विश्वास बचा था। बड़े होने पर उन्होंने अपनी जिंदगी जीसस को समर्पित कर दी। पहले वह पादरी बने और फिर बिशप। वह आधी रात को बच्चों को गिफ्ट दिया करते थे, ताकि कोई उन्हें देख नहीं पाए। यह सिलसिला आज भी चल रहा है और लोगों को सेंटा का इंतजार रहता है।सैंटा क्लॉज के बारे में ऐसी मान्यता है कि सैंटा का घर उत्तरी ध्रुव पर स्थित है और वे उड़ने वाले रेनडियर की गाड़ी पर चलते हैं। हालांकि सैंटा का यह रूप 19वीं सदी से चलन में आया उसके पहले ऐसा नहीं था।संत निकोलस बचपन में ही अनाथ हो गए थे जिसके कारण उनकी प्रभु यीशु में गहरी आस्था थी।संत निकोलस बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी फिर बाद में बिशप बनें। उन्हें बच्चों और जरुरतमंद लोगों को उपहार देना बहुत अच्छा लगता था। संत निकोलस जब भी किसी को उपहार देते थे तो हमेशा आधी रात को ही देते थे क्योंकि उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं करते थे और वह अपनी पहचान किसी के सामने जाहिर करना नहीं चाहते थे।

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