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    जेट एयरवेज और टाटा के बीच सौदे पर फिर चर्चा गरम

    जेट एयरवेज और टाटा के बीच सौदे पर फिर चर्चा गरम

    मुंबई। टाटा संस द्वारा जेट एयरवेज को खरीदने के लिए गंभीर बातचीत होने की चर्चा फिर से सामने आई है। इस बार बातचीत में कुछ नए बिंदु भी खुलकर आए हैं। हालांकि टाटा समूह ने अभी भी इन्हें अटकलें करार दिया। बातचीत होने की जानकारी इस मामले से जुड़े सूत्रों ने दी। इस डील की बदौलत भारी-भरकम कर्ज से लदी निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी डूबने से बच सकती है।

    बातचीत से जुड़े दो लोगों ने बताया कि टाटा को जेट में काफी दिलचस्पी है, लेकिन उसने अभी यह तय नहीं किया है कि सौदे का प्रारूप क्या होगा। चूंकि बातचीत बिल्कुल निजी स्तर पर चल रही है, लिहाजा सूत्रों ने पहचान जाहिर नहीं की। संपर्क करने पर टाटा संस की तरफ से कहा गया कि अटकलों पर टिप्पणी करना उसके लिए मुनासिब नहीं है। जेट एयरवेज ने भी टिप्पणी के लिए भेजे गए ई-मेल का कोई जवाब नहीं दिया। बीएसई द्वारा कयासबाजी से जुड़ी खबरों पर स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कंपनी ने कहा कि यह खबर अटकलों से भरी है और बोर्ड में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है जिसे सार्वजनिक रूप से बताए जाने की जरूरत हो। लेकिन एक सूत्र ने बताया कि दोनों के बीच सौदे का एक तरीका यह हो सकता है कि टाटा जेट एयरवेज के विमान, पट्टे, पायलट और स्लॉट्स समेत सभी संपत्तियों का अधिग्रहण कर ले, लेकिन पूरी कंपनी न खरीदे। इस मामले में टाटा संस को यह समझना होगा कि कंपनी को मुनाफे में लाया जा सकता है या नहीं।

    टाटा ग्रुप को यह भी समझना होगा कि लागत और रणनीतिक नजरिये से डील सही साबित हो सकती है या नहीं और यह भी कि विमानन क्षेत्र की उसकी अन्य कंपनियों के साथ जेट का तालमेल बिठाना किस हद तक संभव होगा। टाटा ग्रुप पहले से देश में दो विमानन कंपनियों का संचालन कर रही है। सिंगापुर एयरलाइंस के साथ फुल सर्विस प्रोवाइडर विस्तारा और एयरएशिया ग्रुप के साथ किफायती विमानन कंपनी एयरएशिया इंडिया में टाटा की हिस्सेदारी है। गोयल नियंत्रण छोड़ने को तैयार इससे पहले जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने रतन टाटा और मुकेश अंबानी से अपनी कंपनी को संकट से उबारने के लिए मदद मांगी थी।

    इसके बाद टाटा ग्रुप ने जेट में दिलचस्पी दिखाई। लेकिन, शुरुआत में इस बात पर चर्चा अटक गई कि गोयल टाटा संस के हाथ में जेट एयरवेज का कंट्रोल नहीं देंगे। लेकिन, अब माना जा रहा है कि वे सैद्घांतिक तौर पर इस बात के लिए राजी हो गए हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ शर्तें रखी हैं। एक शर्त यह है कि जेट एयरवेज पर कंट्रोल छोड़ने की एवज में टाटा ग्रुप गोयल को प्रीमियम दे। सोमवार को जेट एयरवेज ने जुलाई-सितंबर 2018 तिमाही के नतीजे घोषित किए थे। कंपनी को 1,261 करोड़ रुपये का समेकित घाटा हुआ। टाटा संस के साथ डील की संभावना के बीच बीएसई में जेट एयरवेज के शेयर 5.21 प्रतिशत उछाल के साथ 254.65 रुपये पर बंद हुए।

     

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