Wednesday , 17 October 2018
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    ताजमहल के दीदार के लिए अब और ढीली करनी पड़ेगी जेब, बढ़ाई गई एंट्री फीस

    ताजमहल के दीदार के लिए अब और ढीली करनी पड़ेगी जेब, बढ़ाई गई एंट्री फीस

    नई दिल्ली: दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को देखने के लिए अब आपको अपनी जेब पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. दरअसल, आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ताजमहल परिसर में प्रवेश के लिए लगने वाले एंट्री फीस को बढ़ा दिया है. नई दरों के मुताबिक अब घरेलू पर्यटकों को पहले के मुकाबल 10 रुपये ज्यादा का भुगतान करना होगा वहीं विदेश से आए पर्यटकों को 100 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे. मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार अब विदेशी पर्यटकों को ताजमहल देखने के लिए 1,100 रुपये चुकाने होंगे जबकि पहले इन्हें 1000 रुपये चुकाने होते थे. नई फीस में से 500 रुपये टोल टैक्स के रूप में जाएगा, जिसे आगरा डेवलपमेंट ऑथिरिटी लेगी. वहीं इनके अलावा सार्क देशों से आने वाले पर्यटकों को अब ताज का दीदार करने के लिए 540 रुपये चुकाना होगा, इसमें 500 रुपये टोल टैक्स भी शामिल है. गौरतलब है कि बीते ढाई साल में यह दूसरा मौका है जब ताजमहल में प्रवेश के लिए एंट्री फीस को बढ़ाया गया हो. इससे पहले वर्ष 2016 में इसकी फीस में बढ़ोतरी की गई थी.

    ताजमहल के अलावा देश के अन्य स्मारकों में प्रवेश को लेकर भी शुल्क में बढ़ोतरी की गई है. ध्यान हो कि ताजमहल बीते कुछ समय से अलग-अलग वजहों से सुर्खियों में बना रहा है. इसकी सुंदरता और रख-रखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले ही यूपी सरकार और संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की भव्यता बहाल करने में नाकाम रहने पर केन्द्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण की निंदा की और सवाल किया कि अगर यूनेस्को संगमरमर के इस स्मारक से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा वापस ले ले तो क्या होगा?  सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की सुरक्षा और संरक्षण के लिये दृष्टिपत्र का मसौदा दाखिल करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लिया और ‘आश्चर्य’ जताया कि दृष्टिपत्र का मसौदा तैयार करते समय इस विश्व धरोहर के संरक्षण के लिये जिम्मेदार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से कोई परामर्श नहीं किया गया.

    न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि टीटीजेड क्षेत्र में प्रदूषण करने वाले 1167 उद्योग धंधे चल रहे हैं. पीठ ने कहा कि 1996 में शीर्ष अदालत के एक आदेश के बाद गठित टीटीजेड प्राधिकरण ‘फ्लॉप ’ रहा है और ऐसा लगता है कि इस मामले में ‘तमाशा’ हो रहा है. कोर्ट ने कहा कि आपके पास एक कॉमेडी चैनल होना चाहिए. ताज ट्रैपेजियम जोन करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसके दायरे में उप्र के आगरा , फिरोजाबाद , मथुरा , हाथरस और एटा तथा राजस्थान का भरतपुर जिला शामिल है.

    पीठ ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से जानना चाहा था कि , ‘यूनेस्को का विश्व धरोहर केन्द्र पेरिस में है. क्या आप यूनेस्को के विश्व धरोहर केन्द्र के सामने (ताजमहल का) प्रबंधन योजना पेश कर रहे हैं ? इसे पेश नहीं किया गया है. अगर यूनेस्को कहता है कि हम ताजमहल का विश्व धरोहर दर्जा वापस लेंगे तो क्या होगा.’इसके जवाब में वेणुगोपाल ने कहा , ‘यह देश के लिए बहुत बहुत शर्मिंदा करने वाला होगा. हम यह सह नहीं सकते कि यह (ताजमहल) यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची से बाहर हो जाए.’ पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी को ताजमहल के संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी.

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