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    दो महीने में 50% तक बढ़े कागज के दाम, संकट के दौर से गुजर रहा भारतीय कागज उद्योग!

    दो महीने में 50% तक बढ़े कागज के दाम, संकट के दौर से गुजर रहा भारतीय कागज उद्योग!

    बरेली। देश के कागज उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वुड पल्प (लकड़ी की लुगदी) की कमी का असर देश के बाजार पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने वाली पूरी लुगदी चीन उठा रहा है। इससे देश में इसका आयात जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रहा है। कच्चा माल न मिलने के कारण कागज की कीमतों में गत दो महीने में पचास फीसदी तक की वृद्धि हो गई है।

    कागज निर्माण में लगे कुटीर उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है। इससे जुड़े तमाम लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा उत्पन्न हो गया है। देश में वुड पल्प का बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है। चीन में कुछ समय पहले तक रद्दी को रीसाइकिल करपल्प तैयार किया जाता था लेकिन वहां इस पर प्रतिबंध लगने के बाद चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़ी मात्रा में वुड पल्प खरीद रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय कागज उद्योग पर भी पड़ते दिख रहा है।

    उत्तर प्रदेश का बरेली कागज की बड़ी मंडी है। यहां हर महीने करीब पांच सौ टन कागज की खपत होती है। यह सारा कागज ब्रोकरों के जरिए मिलों से जिले के व्यापारियों के पास पहुंचता है। जिले में करीब दो सौ बड़े व्यापारी समेत पांच सौ से अधिक छोटे व्यापारी स्टेशनरी कारोबार में लगे हैं। इसके साथ ही यहां हजारों लोगों के रोजगार का साधन कुटीर उद्योग के रूप में कागज का काम है। बंडल या रोल के रूप में सादा कागज आने के बाद यहां कारखानों में बाइंडिंग, रूलिंग, कवर, पैकिंग आदि का काम होता है।

    पिछले 20 साल की बात करें तो कागज के दामों में अमूमन एक या दो रुपए प्रति किलो तक की तेजी आती थी। इस बार दो महीने में करीब 30 से 40 रुपए प्रति किलो के दाम बढ़ गए हैं। कागज का एक रिम जो डेढ़ सौ रुपए का आता था, आज उसकी कीमत करीब 220 रुपए हो गई है। इस तरह करीब 50 फीसदी तक दामों में बढ़ोतरी हुई है।

    कागज का काम करने वाले व्यापारी अमूमन एक साथ ही माल का सौदा कर लेते थे, फिर मिल से थोड़ा-थोड़ा माल मंगवाते थे। इस बार व्यापारी को देने के लिए मिलों के पास माल ही नहीं है। कारखानों में स्टॉक खत्म हो गया है। व्यापारी नुकसान के डर से खरीद नहीं रहा है। कारखानों में कारीगर बैठे हुए हैं। स्टेपलर, पेस्टिंग, मिशिल उठाना, रूलिंग करने वाले कारीगरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। व्यापारी परेशान हैं कि जनवरी से शुरू होने वाले सीजन के लिए अभी से तैयारी करनी होती है लेकिन कच्चा माल नहीं मिल रहा है।

    स्टेशनरी मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश जसोरिया ने बताया, कागज के व्यापारियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। पिछले बीस सालों में कागज के दामों में पचास फीसदी तक की बढ़ोतरी आई है। इसके आगे भी बढ़ने की संभावना है। जनवरी से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए व्यापारी अभी से तैयारी शुरू कर देते हैं लेकिन कच्चा माल मिलने में परेशानी हो रही है। गोदामों में जो भी माल था, सब बाहर आ गया है। नया माल बाजार में नहीं आ रहा है। इस कारण कुटीर उद्योग चलाने वाले भी परेशान हैं।

    महंगा हुआ कागज

    -दो महीने में 50 फीसदी तक बढ़े कागज के दाम

    150 में मिलने वाला रिम 220 में मिल रहा

    -कुटीर उद्योगों पर भी पड़ रहा असर

    कई कामगारों से रोजगार छिनने का खतरा

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