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    नक्सली नेताओं के जुटने की सूचना पर निकले थे 400 जवान, घात लगाए पेड़ों पर बैठे थे दुश्मन

    नक्सली नेताओं के जुटने की सूचना पर निकले थे 400 जवान, घात लगाए पेड़ों पर बैठे थे दुश्मन

    जगदलपुर.नारायणपुर के अबूझमाड़ में गणतंत्र दिवस के विरोध में नक्सली एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने वाले थे। इसके लिए कई बड़े नेता इस इलाके में पहुंचे हुए थे। बड़े नेताओं के आने और गणतंत्र दिवस पर बड़ा कार्यक्रम करने का इनपुट पुलिस व अन्य सुरक्षा एंजेसियों के पास तीन चार दिनों पहले ही पहुंच गया था लेकिन किसी भी एजेंसी के पास यह पुख्ता जानकारी नहीं थी कि गणतंत्र दिवस के विरोध समारोह में शामिल होने के लिए कौन-कौन से नेता यहां पहुंचे हैं

    सूचना पर निकले थे 400 जवान

    – इरपानार के जंगलों से निकलकर जो खबर आ रही है उसके अनुसार बड़े नक्सली नेता दो दिनों पहले ही अबूझमाड़ में शिफ्ट हो गए थे और इनकी सुरक्षा के लिए नक्सलियों ने कई लेयर की सिक्यूरिटी तैयार की थी। इसमें से पहली लेयर को अबूझमाड़ के बॉर्डर माने जाने वाले इरपनार में तैनात रखा गया था ताकि यदि इस ओर से फोर्स के जवान आए तो उन्हें रोका जाए।

    – बताया जा रहा है कि जब जवान इस ओर पहुंचे तो बड़े नक्सलियों की सिक्यूरिटी में लगी पहली ही लेयर ने इन पर हमला कर दिया। चूंकि बड़े नेता अबूझमाड़ में मौजूद थे ऐसे में महाराष्ट्र सहित दरभा इलाके के कई नक्सलियों की डयूटी इस इलाके में लगाई गई थी।

    – इधर नक्सली हमले के बाद एडीजी डीएम अवस्थी ने भी बताया कि अबूझमाड़ में बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमा होने की खबर मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों की संयुक्त पार्टी को वहां के लिए रवाना किया गया था। इस पार्टी में करीब 400 जवान थे।

    पहले से तैयार थे नक्सली, पता था जवान अबूझमाड़ में यहीं से आएंगे
    नक्सलियों के बड़े लीडर गणतंत्र दिवस के बहिष्कार के संबंध में रणनीति पर विचार के लिए लिए यहां जुटे थे। नक्सलियों को पता था कि इसकी खबर फोर्स तक पहुंचेगी और जवान अबूझमाड़ में बड़ा ऑपरेशन लांच करेंगे। यही कारण है कि बड़े नेताओं की सुरक्षा में पहली लेयर में कई मिलिट्री कमीशन के मेंबरों को भी तैनात रखा गया था। पुलिस सूत्रों की मानें तो जैसे ही जवानों और नक्सलियों का आमना सामना हुआ तो नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलियां तो बरसाई ही साथ में एक बड़ा बलास्ट भी किया। बताया जा रहा है कि ब्लास्ट के कारण ही जवानों को ज्यादा नुकसान हुआ है।

    टीसीओसी या इसके आसपास जब भी पीएचक्यू बदलता है एसपी, हो जाती है बड़ी वारदात

    पिछले तीन सालों में बस्तर के अलग-अलग जिलों में कई बड़े नक्सली हमले हुए। इन हमलों की सबसे खास बात यह है कि या तो यह हमले टीसीओसी के दौरान हुए या फिर टीसीओसी की शुरुआत से कुछ पहले लेकिन इसमें एक इत्तेफाक या पीएचक्यू की रणनीतिक चूक यह है कि नक्सलियों ने उसी इलाके में बड़ी वारदात को अंजाम दिया जहां के एसपी बदले गए।
    दरअसल पिछले कुछ सालों से बस्तर के नक्सल प्रभावित जिलों के एसपी के तबादले एेन टीसीअोसी से पहले किए जा रहे हैं। टीसीओसी यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन, जो पुलिस और नक्सली दोनों ही अपने-अपने ढंग से चलाते हैं। इसी टीसीओसी के दौरान नक्सली बड़ी वारदातों को अंजाम देते हैं और इस दौरान वे नए लड़कों को भी संगठन से जोड़ते हैं। ठीक इससे पहले हुए तबादलों का फायदा नक्सली उठा रहे हैं और वे बड़े हमले कर रहे हैं।

    1. देश का सबसे बड़ा झीरम का हमला भी इसी का प्रमाण
    देश के सबसे बडे नक्सली हमले के दौरान भी पीएचक्यू ने बस्तर एसपी को बदला था। वर्ष 2013 के फरवरी में तत्कालीन एसपी बीएन मीणा को हटाकर मयंक श्रीवास्तव को लाया गया था। इसके ठीक दो माह बाद टीसीओसी के दौरान नक्सलियों ने झीरम में कांग्रेस काफिले को निशाना बनाया और कई बड़े कांग्रेसी लीडर मारे गए।

    2. भेज्जी और बुर्कापाल हमला भी टीसीओसी के दौरान ही हुआ
    सुकमा जिले के भेज्जी और बुर्कापाल में नक्सलियों ने पिछले साल मार्च माह में बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था। इस मामले में खास बात यह थी कि टीसीओसी से ठीक पहले यहां के एसपी आईके एलेसेला को बदलकर उनके बदले अभिषेक मीणा को नियुक्त किया गया था।

    3. अब नारायणपुर एसपी को बदला और इरपानार में वारदात
    टीसीओसी से ठीक पहले पीएचक्यू ने नारायणपुर एसपी संतोष सिंह का तबादला करते हुए उनके स्थान पर संजय शुक्ला को नियुक्त किया। उनके नियुक्त होते ही यहां बड़ी वारदात हो गई।

    जनवरी के बाद मई तक कभी भी चलाते हैं टीसीओसी
    नक्सली जनवरी से लेकर मई के बीच में कभी भी टीसीओसी की शुरूआत कर देते हैं। कभी यह जनवरी से मार्च तक चलता है तो कभी यह फरवरी से अप्रेल तक चलता है। इस दौरान यह तय माना जाता है कि नक्सली किसी ने किसी बड़ी वारदात को अंजाम देंगे ही

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