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    नवरात्रियों में वर्ज़ित एवं अनुशंसित कार्य

    नवरात्रियों में वर्ज़ित एवं अनुशंसित कार्य

    नवरात्रि, यानी कि नौ रातें… जब हिन्दू मान्यताओं के अनुसार शक्ति का स्वरूप मां दुर्गा अपने नौ रूपों के माध्यम से भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इन नौ दिन भक्त मां के सभी रूपों की पूजा करते हैं, सही उच्चारण के साथ मां के मंत्रों का जाप करते हैं तथा नवरात्रि के अनुसार ही फलाहार लेते हैं।

     

    कुछ लोग 7 दिन का व्रत करते हैं तो कुछ लोग पूरे नौ दिन। वहीं कुछ लोग एक या दो दिन का व्रत भी करते हैं। खैर यह तो क्षेत्रीय मान्यताओं और श्रद्धा के कारण होता है, नहीं तो नवरात्रि का तो अर्थ ही है नौ रातें, ना कम और ना ही इससे अधिक। इसलिए मर्यादा के अनुसार देवियों का अखिरी पूजन दशमी पर ही होना चाहिए।

     

    खैर हम इस मुद्दे की ओर ना बढ़ते हुए आज आपको कुछ ऐसी बातों से अवगत कराने जा रहे हैं जो नवरात्र महोत्सव के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन बातों का ध्यान यदि आप रखेंगे तो मां दुर्गा प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।

    मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान ऐसे कुछ कार्य होते हैं जो हमें भूलकर भी नहीं करने चाहिए। जैसे कि स्त्री साहचर्य… यानी कि ऐसा कोई भी काम जो स्त्री से संबंध बनाए, जैसे कि संभोग या स्त्री की ओर आकर्षण। क्योंकि, यह देवी के पूजन का समय है, ना कि संभोग जैसी बातों का। इसके अलावा हमें कौन से खाद्य पदार्थ लेने चाहिए और कौन से नहीं, इन बातों को जानना भी अति आवश्यक है।

     

    आप व्रत करें या ना करें… लेकिन यदि आप हिन्दू मान्यताओं का आदर करते हैं तो आगे बताई जा रही बातों का जरूर ध्यान रखें। व्रत में तामसिक भोजन से दूर रहें, जैसे कि मांस, मछली, मदिरा, नशा, प्याज, लहसुन, आदि वस्तुएं गलती से भी ग्रहण ना करें।

     

    चलिए यह तो खाने-पीने से संबंधित बातें थीं, परन्तु इसके अलावा नवरात्रि के दौरान बाल नहीं कटवाने चाहिए, ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचे और जितना अधिक हो सके धर्म से जुड़ें और पूजा-पाठ करें।

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