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    पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का भतीजा गिरफ्तार, फर्जी बिलों से 10 करोड़ की चपत लगाने का आरोप

    पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का भतीजा गिरफ्तार, फर्जी बिलों से 10 करोड़ की चपत लगाने का आरोप

    नई दिल्ली.एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पीडब्ल्यूडी घोटाले में गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के भतीजे विनय बंसल को गिरफ्तार किया। विनय केजरीवाल के साढ़ू सुरेंद्र कुमार बंसल का बेटा है। बंसल की कंपनी पर पीडब्ल्यूडी के रोड और सीवर के ठेकों में धांधली और फर्जी बिल लगाकर सरकार को 10 करोड़ की चपत लगाने का आरोप है। एक एनजीओ की शिकायत पर एसीबी ने जांच शुरू की थी। बता दें कि सुरेंद्र कुमार की पिछले साल मौत हो गई थी।

    घोटाले में 3 एफआईआर, केजरी का भी नाम शामिल

    – न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एसीबी के अफसरों ने बताया कि विनय बंसल अपने पिता की कंपनी रेणु कंस्ट्रक्शन में पार्टनर है। इसी कंपनी के खिलाफ घोटाले के आरोपों की जांच कर रही है।
    – इस मामले में एसीबी ने 9 मई, 2017 को केजरीवाल और अन्य के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें आरोप है कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार की कंपनी को नियमों को ताक पर रखते हुए रोड और सीवर के टेंडर सौंपे गए।

    जिस कंपनी से कच्चा माल खरीदा वो काल्पनिक: पुलिस

    – दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी विनय बंसल पूछताछ में माधवदेव कंपनी के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। पहले दावा किया गया था कि उसने काम के लिए इसी कंपनी से कच्चा माल खरीदा। पर जांच में पता चला कि माधवदेव नाम की कोई कंपनी है ही नहीं।

    दिल्ली सरकार ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई

    – केजरीवाल सरकार ने घोटाले के आरोपों और विनय बंसल की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। सरकार का दावा है बंसल की कंपनी ने जो काम किया, उसे श्रीराम लैब से हरी झंडी मिल चुकी है। इतना ही नहीं लैब ने एसीबी को जांच बंद करने का सुझाव भी दिया था।
    – इसके अलावा रोड और सीवर प्रोजेक्ट के काम को आईआईटी रुड़की से भी सर्टिफिकेट मिल चुका है।

    एनजीओ की शिकायत पर उजागर हुआ था घोटाला

    – पीडब्ल्यूडी घोटाले का मुद्दा राहुल शर्मा के एनजीओ रोड्स एंटी करप्शन ऑर्गनाइजेशन (आरएसीओ) ने उठाया। शिकायत में कहा गया है कि प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत 4 लाख 90 हजार से 46% कम कीमत में टेंडर रेणु कंस्ट्रक्शन को दिए गए। इसके बाद कंपनी ने काम पूरा करने के लिए घटिया क्वालिटी के सामान का इस्तेमाल भी किया।

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