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पैर के पंजे जमीन पर नहीं पड़ते, लेकिन चेहरे पर नहीं दिखती दिव्यांगता

पैर के पंजे जमीन पर नहीं पड़ते, लेकिन चेहरे पर नहीं दिखती दिव्यांगता

रायपुर । नाम परमसुख, पेशे से रिक्शा चालक… जो रोजाना ढाई से 3 क्विंटल सामान अपने रिक्शे पर रखकर कई किलोमीटर तक छोड़ने जाते हैं। आपको इसमें कुछ भी असामान्य नहीं लग रहा होगा, लेकिन जरा परमसुख के पैर और चेहरे पर नजर डालिए।

दोनों पैर के पंजे पूरी तरह जमीन पर नहीं पड़ते, ये मुड़े हुए हैं, लेकिन चेहरे पर जरा भी यह दिव्यांगता नहीं झलकती। ऊंचाई आने पर जमीन पर होते हैं, समतल पर पैर पैडल पर होते हैं।

यह जीवटता ही है, जो परम को सुख की अनुभूति करवाती है और उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो दिव्यांगता को अभिशाप मानकर लाचारी ओढ़ लेते हैं

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