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ये पांच चुनौतियां होंगी टीम इंडिया के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ

ये पांच चुनौतियां होंगी टीम इंडिया के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की घरेलू वनडे सीरीज का आगाज 17 सितंबर को रहा है। श्रीलंका में विजय रथ पर सवार विराट सेना ने 2019 के विश्वकप को ध्यान में रखते हुए बहुत से प्रयोग किए। ऐसे में सीनियर गेंदबाजों को आराम दिया गया और नए गेंदबाजों को मौका। नए गेंदबाजों ने हाथ आए मौके को दोनों हाथों से लिया और बुमराह 15 विकेट हासिल कर मैन ऑफ द सीरीज बने। वहीं अक्षर, कुलदीप और चहल ने अपनी-अपनी  उपयोगिता साबित की। ऐसे में चयनकर्ताओं ने सीरीज के शुरुआती 3 मैचों के लिए 16 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है जिसमें श्रीलंका दौरे पर गई टीम में तीन बदलाव किए हैं जिसमें शार्दुल ठाकुर को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है वहीं उमेश और शमी की टीम में वापसी हुई है। ऐसे में स्टार स्पिनर जडेजा को आराम दिया गया है और अश्विन को  काउंटी क्रिकेट में व्यस्तता की  वजह से टीम से बाहर रखा गया है। बदलाव के दौर से गुजर रही श्रीलंका के सामने टीम इंडिया ने प्रयोग किए जो काफी हद तक सफल रहे लेकिन कई नई तरह की परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में टीम इंडिया के सामने ये पांच बड़ी चुनौतियां होंगी। भारतीय टीम की आरंभिक बल्लेबाजी तो मजबूत हो गई है। जहां शिखर धवन और रोहित शर्मा शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। तीसरे ओपनर के रूप में अजिंक्य रहाणे टीम के साथ हैं। शिखर या रोहित में से किसी एक की भी गैरमौजूदगी में वो टीम में आ जाते हैं। इसके बाद तीसरे नंबर पर विराट हैं। लेकिन यदि विराट किसी वजह से जल्दी पवेलियन लौट गए तो मिडिल ऑर्डर के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। श्रीलंका में पल्लेकल में खेले गए दूसरे और तीसरे वनडे में मध्यक्रम बिखरा और सारी जिम्मेदारी धोनी के कंधों पर आ गई। ऐसे में  मध्यक्रम में अनुभवी बल्लेबाज की कमी खल रही है।  केएल राहुल को नंबर चार पर खिलाने का जुआ टीम इंडिया ने खेला जो असफल रहा। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में मध्यक्रम लड़खड़ाया इसका मतलब यहां किसी अनुभवी खिलाड़ी की जरूरत है। युवराज अगर यहां नहीं हैं तो रैना की जगह बनती है। मनीष पांडे और केदार जाधव लोअर मिडिल ऑर्डर के खिलाड़ी हैं।ऐसे में इन दोनों को फिनिशर की भूमिका निभानी होती है लेकिन केदार भी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।चयनकर्ताओं ने श्रीलंका दौरे की बल्लेबाजों में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में जो बल्लेबाज कंगारुओं के खिलाफ  घरेलू परिस्थितियों में भी असफल रहेंगे उनकी 2019 के विश्वकप में खेलने की संभावना कम हो जाएगी। इस परेशानी का समाधान निश्चित तौर पर टीम इंडिया ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ निकालने की कोशिश करेगी।  श्रीलंका दौरे पर शानदार प्रदर्शन करने वाले एमएस धोनी का विकल्प अभी टीम इंडिया के पास नहीं है। धोनी ने दो मैचों में अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिलाई। लेकिन यदि किसी वजह से धोनी चोटिल हो जाएं तो टीम इंडिया के पास उनका कोई विकल्प नहीं है। हालांकि धोनी वनडे और टी-20 क्रिकेट ही खेलते हैं। लेकिन किसी भी वजह से उनके बाहर जाने पर टीम को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और टीम के पास कोई विकल्प नहीं होगा। ऐसे में धोनी के विकल्प की तलाश करना भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि ऋषभ पंत को एक-दो मौके मिले हैं लेकिन वो उन्हें भुना पाने में नाकाम रहे। दिनेश कार्तिक भी एक विकल्प हैं लेकिन उनके लिए स्थाई रूप से टीम में जगह नहीं बन पा रही है। धोनी की विकेट कीपिंग की भरपाई तो किसी तरह हो सकती है लेकिन वो जिस तरह मुश्किल वक्त में टीम की नैया पार लगाते हैं उस कसौटी पर दूसरे खिलाड़ियों का खरा उतर पाना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।  एेसे तो हार्दिक पांड्या के रूप में टीम इंडिया को एक ऐसा ऑलराउंडर मिल गया है जो तेज गेंदबाजी का विकल्प मुहैया कराता है। ऐसे में ऑलराउंडर की दौड़ में रविंद्र जड़ेजा और रविचंद्रन अश्विन भी शामिल हैं। लेकिन श्रीलंका में जीत के बाद जिस तरह कप्तान कोहली और कोच रवि शास्त्री ने एक सुर में कहा था कि हर खिलाड़ी की एक निश्चित भूमिका होगी और वो चाहते हैं कि सभी खिलाड़ी सब कुछ कर सकें जिससे कि भारतीय टीम के बार में किसी भी तरह का अंदाजा लगा पाना विरोधी टीमों के लिए मुश्किल हो। टीम इंडिया एक सेट पैटर्न के साथ न खेले। इसके लिए ऑलराउंडर्स की भूमिका भी अहम हो जाती है लेकिन स्पेशलिस्ट गेंदबाजों की कमी कई बार टीम के लिए घातक साबित हो जाती है। इसलिए घरेलू सीरीज में ऑलराउंडर की भूमिका टीम में किस हद तक हो ये सुनिश्चिच करना भी एक बड़ी चुनौती है। यदि टीम में हार्दिक की जगह पक्की हो जाती है तो टीम किन दो स्पिनर्स के साथ मैच में उतरेगी इस सवाल का जवाब ढूंढना बेहद अहम है। अश्विन और जडेजा को फिलहाल आराम दिया गया  है लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज अगर अक्षर, चहल और कुलदीप पर हावी हो जाते हैं तो 2019 विश्वकप  के लिए टीम जडेजा-अश्विन के साथ किसे टीम में रखना चाहेगी जो विदेशी धरती पर भी उपमहाद्वीप की पिचों की तरह प्रभावी हो सके। दो नियमित तेज गेंदबाज तो टीम का हिस्सा होंगे ही। एक स्पिनर जडेजा या अश्विन या फिर दोनों, पांचवां स्थान हार्दिक और केदार पूरा कर देंगे। ऐसे में अक्षर, कुलदीप और चहल की टीम में जगह को लेकर बड़ी चुनौतियां आने वाले समय में खड़ी होंगी। कोहली और शास्त्री इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगे ये देखना बेहद अहम होगा।

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