Monday , 22 January 2018
पाठक संख्याhit counter
    English
BREAKING NEWS
शाजापुर के आंवले की डिमांड बढ़ी , बगीचा बढ़ा रहा है आय …..

शाजापुर के आंवले की डिमांड बढ़ी , बगीचा बढ़ा रहा है आय …..

जिले में संतरे की फसल पर मौसम की मार पड़ने से 80 फीसदी तक का नुकसान हो रहा है लेकिन जिन किसानों के पास आंवले के बागीचे हैं, वे मालामाल हो रहे हैं। दरअसल, इस बार यूपी के प्रतापगढ़ क्षेत्र में आंवला फसल की कम पैदावार के चलते जिले के आंवला फसल की मांग बढ़ गई है। जिससे वे सभी किसान जो की संतरे की फसल का उत्पादन करने से नुकसान में आ गए थे तो अब वे आंवले को बेच कर अपने नुकसान की भरपाई कर रहे है |जिले में आलू, संतरा, प्याज का तो उत्पादन बहुतायात में होता है, लेकिन आंवला जैसी औषधि फसल के उत्पादन के प्रति अभी किसानों का रूझान कम ही है। वहीं जो किसान आंवले का उत्पादन कर रहे हैं, वे मालामाल हो रहे हैं। यहां का आंवला बिहार, उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराचंल तक भेजा जा रहा है। इसका च्यवनप्राश, त्रिफला सहित अन्य आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जा रहा है। बाहर के व्यापारी इन दिनों आंवला फसल का सौदा करने जिले में पहुंच रहे हैं। जिससे किसानो की आस बढ़ गयी है |साथ ही वह किसान जो इस तरह की फसल उत्पादन में रूचि नहीं दिखते थे वे भी अब जागरूक हो रहे है |
एक पौधे से 5 क्विंटल आंवला वे बताते हैं कि एक पौधा चार से पांच क्विटल तक फल देता है। हर वर्ष बढ़ रहे उत्पादन से उनकी आमदनी भी बढ़ रही है। कृषक ने बताया कि बागीचे में वह कभी भी रसायनिक दवाओं का उपयोग नहीं करते। जैविक तरीके से ही खेती करते हैं।
कुछ अलग करने की सोच की थी जरूरत :
कृषक न ने बताया कि वे पहले परंपरागत खेती करते थे, लेकिन राजस्थान के उनके एक रिश्तेदार भ ने उन्हें आंवला फसल के उत्पादन की सलाह दी थी। बुआई पर 5 हजार रुपए बीघा का खर्चा आया। इस प्रकार उन्हें एक बार कुल 75 हजार रुपए का खर्चा आया। पांच वर्ष पौधों से आंवला फसल की पैदावार होने लगी। उन्होंने बताया कि किसानों को चाहिए कि वह परंपरागत खेती में बदलाव की शुरूआत करें।

About admin