Thursday , 20 September 2018
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    सागर में मोती की लड़ी

    सागर में मोती की लड़ी

    सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां , जिंदगी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहां

    छुट्टियों में विदेश की घुमक्कड़ी करना चाहें और अमेरिका, यूरोप या किसी और दूर देश की सैर संभव न हो तो अपने पड़ोसी देश मालदीव की सैर पर तो जा ही सकते हैं। बमुश्किल तीन से चार घंटे का हवाई स़फर तय कर आप मालदीव पहुंच सकते हैं। दुनिया भर के पर्यटकों को लुभाने में सक्षम यह देश प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में अपना कोई सानी नहीं रखता। आसमान से इसका विहंगम दृश्य देखकर तो ऐसा लगता है, गोया किसी ने मोतियों की माला तोड़ कर हिंद महासागर को अर्पित कर दी हो। जी हां! समुद्र में छोटे-बड़े कुल 1190 द्वीपों को समूहबद्ध करके बना यह देश देखने में ऐसा ही लगता है।

    इसका हर द्वीप अपने आपमें मोती की एक लड़ी जैसा ही दिखता है। इनमें से करीब 200 से अधिक द्वीपों पर आबादी नहीं के बराबर है, परंतु बाकी द्वीपों में चहल-पहल है। 87 द्वीपों पर तो बहुत अच्छे-अच्छे रिसॉर्ट भी हैं। श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस द्वीप समूह में विदेशी पर्यटकों के चलते चहल-पहल हमेशा बनी रहती है। यहां की समुद्र की लहरें और उन पर पड़ने वाली सूरज की चमकीली धूप आपका मन मोह लेती हैं। यहां के समुद्र का नीला रंग इतना प्यारा और इतनी तरह का है कि उस पर एक पूरी किताब ही लिखी जा सकती है। मालदीव लंका के दक्षिण पश्चिम में स्थित है, यहां छोटे-बड़े कुल 1190 द्वीप समूह हैं।

    मिला-जुला है समाज

    इस द्वीप समूह की राजधानी है माल, जो व्यापार का केंद्र है और सभी प्रमुख सरकारी कार्यालय भी यहीं स्थित हैं। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा संस्थान सभी कुछ यहां उपलब्ध हैं। यह एक छोटा-सा द्वीप है जो द्वीप समूह के बीचोबीच है। यहां लगभग 75,000 लोगों की आबादी है जो पूरी आबादी का एक तिहाई हिस्सा है। यह द्वीप समूह भूमध्य रेखा के पास है। अत: यहां मौसम हमेशा गर्म और आर्द्र् रहता है। तापमान 29 डिग्री से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

    यहां के लोग सूती और खुले कपड़े पहनना पसंद करते हैं। स्त्रियॉ आधुनिक वस्त्र धारण करती हैं जो पसीने और गर्मी से उनकी रक्षा कर सके। सांस्कृतिक रूप से यहां का समाज मिला-जुला है, क्योंकि समय-समय पर यहां सारी दुनिया से लोग आए और बस गए। इसलिए यहां एक मिली-जुली संस्कृति देखने को मिलती है। यहां के नाच-गाने दक्षिणी अफ्रीका से प्रभावित हैं। धार्मिक रूप से यहां मुसलिम आबादी अधिक है।

    यहां का मुख्य व्यवसाय मछली, पर्यटन, खेती और नारियल को जटाओं की विभिन्न हस्तशिल्प वस्तुएं बनाने का है। यहां आपको हर तऱफ नारियल के पेड़ दिखाई देंगे। खेती में ज्वार-बाजरा मुख्य रूप से पैदा होता है। और उष्ण प्रदेश के फल जैसे कटहल, तरबूज, खरबूज, जिमींकंद वगैरह आसानी से मिल सकते हैं।

    निर्णायक भूमिका में स्त्रियॉ

    यहां एक बात आपको और आकर्षित करेगी, वह है यहां स्ति्रयों की स्थिति। यहां स्ति्रयों की अपनी अलग भूमिका है। यहां वे निर्णायक भूमिका निभाती हैं, क्योंकि पुरुष तो पूरे दिन समुद्रों में मछलियां पकड़ने गए होते हैं।

    पानी के भीतर की दुनिया

    लोगों का मुख्य आकर्षण यहां का वॉटरगेम है जैसे डाइविंग, फिशिंग, स्नॉर्केलिंग आदि। आपने यहां आकर यदि सबमेरीन यानी पनडुब्बी की सैर नहीं की तो कुछ नहीं किया। पनडुब्बी की सैर में आप गोताखोरी भी कर सकते हैं। पनडुब्बी आपको पानी की सतह से 100 फुट अंदर तक पानी में ले जाएगा और पानी के नीचे की दुनिया का ऩजारा आप अपनी आंखों से देख सकते हैं। समुद्र के भीतर रहने वाले जलीय जीवों की उस अनोखी दुनिया को आप करीब से रूबरू होकर जान सकते हैं जिसकी कल्पना भी आपके  लिए अभी मुश्किल है। यह रोमांचकारी सुविधा दुनिया के केवल कुछ ही देशों में उपलब्ध है।

    जब आप पानी के अंदर चले ही गए हैं तो फोटोग्राफी जरूर करिएगा, क्योंकि मालदीव के पानी के नीचे की दुनिया कमाल की है। पानी के अंदर आपको रंग-बिरंगी मछलियां, कोरल, शंख-सीप, ऑक्टोपस आदि दिखाई देंगे, जिन्हें आप अपने कैमरे में बंद कर के अमर कर सकते हैं। यदि आपके पास अपना कैमरा नहीं है तो भी कोई बात नहीं। यह किराए पर भी आप को उपलब्ध हो सकता है। जो रिसॉर्ट खुद  करवा देगा। पानी के अंदर हमेशा डि़जिटल कैमरे का इस्तेमाल करना ही ठीक रहता है। प्रत्येक रिसॉर्ट में जो गोताखोरी के स्कूल हैं, वहां गोताखोरी का सामान उपलब्ध रहता है, परंतु गोताखोरी के कुछ नियम-कायदे भी हैं। उनका पालन करना अति आवश्यक है। जैसे से़फ्टी लैंप, कंप्यूटर आदि का प्रयोग ऑक्सीजन गैस सिलेंडर का प्रयोग, फेस मास्क का प्रयोग आदि।

    गोताखोर स्कूल वैसे तो रो़ज ही डाइव पर लेकर जाते हैं, पर इसके कुछ खास मौसम भी होते हैं। यदि आप गर्मी या अप्रैल से जून तक और फिर अक्टूबर से जनवरी तक जाएं तो अच्छा है।

    मालदीव वॉटर गेम के लिए ही अधिक प्रसिद्ध है। प्रत्येक रिसॉर्ट के पास डाइविंग, स़िर्फग और स्नोर्केलिंग की सुविधा होती है।

    शांत द्वीप है माल

    माल यहां की राजधानी है। यहां आपको ऊंची-ऊंची इमारतें और चौड़ी सड़कें ही मिलेंगी। यहां एक तऱफ सरकारी द़फ्तर हैं और दूसरी तऱफ बा़जार, परंतु यहां का पुराना बा़जार बहुत ही संकरा है। वहां की गलियों से एक वाहन ही ठीक से निकल सकता है। माल एक हरा-भरा शांत द्वीप है, जहां लोग मौज-मस्ती करने आते हैं। यहां भी मुख्य आकर्षण समुद्र के खेल ही हैं।

    यहां खाने-पीने की बहुत सी वरायटी आपको मिल जाएगी, यदि आप शाकाहारी हों। यहां की कला यदि देखनी हो तो आप को यहां के पत्थर और लकड़ी के नक्काशी जरूर लेनी चाहिए, जो आपको बाजार में सरलता से उपलब्ध होगी। यहां के लकड़ी के ऊपर का काम सच में बहुत ही आकर्षक है, साथ ही यहां की चटाइयां जिन्हें ये लोग बुनते हैं और प्राकृतिक रंगों से रंगते हैं। इन्हें यहां की भाषा में हा कहते हैं। इन मैट्स के डि़जाइन इतने सुंदर होते हैं कि आंखें फटी की फटी रह जाएं।

    यहां की ठंडी शाम में शॉपिंग का म़जा ही कुछ और है। नेजीधी मंगू (जो यहां की मुख्य सड़क है) के दोनों ओर बहुत सी दुकानें है जहां आप को सब कुछ मिल जाएगा। यह  एक खुला अंतरराष्ट्रीय बा़जार है जहां आपको सेंट, पऱफ्यूम्स, कॉस्मैटिक तथा गहने मिल सकते हैं। कपड़े भी मिल जाते हैं। यहां के बा़जार की एक खास बात यह है कि यह शाम को खुलता है। शाम 5 बजे से रात एक-दो बजे तक आप शॉपिंग कर सकते हैं। मालदीव में आप यहां के टूरिज्म डिपार्टमेंट में आए और यहॉ से इस द्वीप का इतिहास भूगोल तथा समुचित जानकारी लेकर घूमना शुरू करें, आपका स़फर मंगलमय होगा।

    जरूरी जानकारियां

    उड़ानें: मालदीव जाने के लिए मुंबई, मद्रास या दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नियमित उड़ानें हैं।

    वीजा: मालदीव के लिए आपको 30 दिन का वीजा आसानी से मिल सकता है। यह वीजा कुछ मामूली औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आप पा सकते हैं और मालदीव रिपब्लिक का वीजा ले कर 30 दिन तक वहां आराम से रह सकते हैं।

    कहां ठहरें: यहां के मुख्य रिसॉर्ट हैं व्हाइट सैंड्स रिसॉ‌र्ट्स एंड स्पा आइलैंड, एडेरन क्लब,  अलीमाथा एक्वेटिक रिसॉर्ट, चोया लैगून हकूरा आदि। ये सभी रिसॉर्ट ऐसे हैं जहां आपको सभी आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इन सभी रिसॉ‌र्ट्स के अपने डाइविंग स्कूल भी हैं, जो सभी आधुनिक यंत्रों और सुविधाओं से लैस हैं। यहां आपको दुभाषिए भी आसानी से मिल जाएंगे।

    भाषा: यहां दिवेही भाषा बोली जाती है। परंतु रिसॉर्ट या होटल बा़जार में आप को भिन्न-भिन्न भाषाओं के जानकार लोग मिल जाएंगे। यदि आप को अंग्रे़जी, जर्मन या फ्रेंच आती है, तो भी चलेगा। यहां के रिसॉर्ट में कई भाषाओं के जानकार रहते हैं जो आपको परेशान नहीं होने देंगे।

    मुद्रा: यहां की मुद्रा रुपिया है और जो 5, 10, 20, 50, 100 और 500 के नोट में उपलब्ध हैं तथा सिक्के 1, 2, 5, 10, 20, 50 और 100 के चलते हैं।

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