Tuesday , 25 September 2018
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    सालभर नहीं टिक पाए रेल ब्रिज, पानी में डूबे 500 करोड़

    सालभर नहीं टिक पाए रेल ब्रिज, पानी में डूबे 500 करोड़

    रायपुर। वाल्टेयर रूट के दोहरीकरण पर अभी तक 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। नई पटरी बिछाने में रेलवे के इंजीनियरों ने कहीं न कहीं चूक की, जिसका खामियाजा यह हुआ कि रेल ब्रिज सालभर भी नहीं टिक पाए। ईस्ट कोस्ट रेलवे के रायगढ़ा-टिटलागढ़ और कोरापुट-रायगढ़ा सेक्शन में चार ब्रिज और पटरियों के धवस्त होने से निर्माण की पोल खुल गई है।

    इन पटरियों को लगभग सालभर पहले ही बिछाई गई थी। इन्हें बिछाने के पूर्व रेलवे इंजीनियरों की टीम ने सर्वे किया था। पहाड़ियों और नदी-नालों से घिरे विषम परिस्थितियों से जूझने के काबिल ट्रैक बिछाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन पहली बारिश में ही पहाड़ी नदी-नालों के उफान का झेल पाने में ये ट्रैक फेल हो गए। अब बारिश थमने के बाद ही मरम्मत कार्य होगा।

    भौगोलिक परिस्थितियों के आकलन में फेल-

    नए ट्रैक बिछाने से पूर्व भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन किया जाना था। रेलवे के मुताबिक इसके तहत यह देखना था कि कितने घंटे की बारिश में पहाड़ से घिरे ट्रैक पर पानी का वेग बढ़ जाता है। इसे इस तरह बनाना था कि ट्रैक पानी में डूब जाएं भी तो कोई नुकसान न हो। ताकि पानी का बहाव कम होने के बाद ट्रेनों का परिचालन किया जा सके। नये रेलवे ब्रिज को मजबूत बनाने की जरूरत थी, क्योंकि हर साल बारिश में कहीं न कहीं इस रूट पर रेलवे ब्रिज ध्वस्त होता है। इसमें भी रेलवे के इंजीनियर चूक गए।

    पुराने ट्रैकों को बदलना और नए बिछाना बाकी-

    आज भी ओडिशा और आंध्रप्रदेश रूट पर पुराने ट्रैकों को बदलना बाकी है। इसके साथ ही नई रेल लाइन बिछाने की भी योजना है। इससे बस्तर से दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी हो जाएगी। आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा से सीधा रेल संपर्क हो जाएगा। किरंदुल-कोत्तवलसा रेललाइन के लिए बजट आवंटित कर दिया गया है।

    इसका कार्य भी चल रहा है। इसमें किरंदुल-जगदलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 150 करोड़ रुपये, जगदलपुर-कोरापुट रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये, कोरापुट-कोत्तवलसा के लिए 230 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके अलावा किरंदुल-कोत्तवलसा रेल लाइन पर दो अंडर ब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है।

    आधिकारिक बयान से बच रहे रेल अफसर-

    पिछले साल भी इसी रूट पर एक ब्रिज बह गया था। इस साल भी ट्रैकों और ब्रिजों के ध्वस्त होने का सिलसिला जारी है। इनमें कहां खामी है, इस पर आधिकारिक रूप से संबलपुर मंडल के रेल अधिकारी बयान देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि कहां चूक हुई, ये जांच का विषय है। वैसे ट्रेनों का परिचालन सामान्य कराने की कोशिश हो रही है। मरम्मत होने में 10 से 15 दिन का समय लग सकता है। तब तक ट्रेनें रद रहेंगी।

     

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