Sunday , 19 November 2017
पाठक संख्याhit counter
    English
BREAKING NEWS
हुआ बड़ा ‘फर्जीवाड़ा स्पोर्ट्स कोटे की भर्ती में, बन गए फॉरेस्ट गार्ड  इस तरह  फर्जी ‘खिलाड़ी’

हुआ बड़ा ‘फर्जीवाड़ा स्पोर्ट्स कोटे की भर्ती में, बन गए फॉरेस्ट गार्ड इस तरह फर्जी ‘खिलाड़ी’

उत्तराखंड वन विभाग में विशेष अभियान चलाकर स्पोर्ट्स कोटे के तहत की गई भर्ती में फर्जीवाड़ा हुआ है।
स्पोर्ट्स कोटे के तहत भर्ती कर फॉरेस्ट गार्ड बनाए गए खिलाड़ियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इसके बाद डीएफओ देहरादून ने आरक्षियों के संबंध में वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने के साथ बर्खास्त करने की संस्तुति की है।

दरअसल, प्रदेश में वन विभाग का नेशनल गेम होना था। इसमें नंबर वन बनने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी। संवेदनशील क्षेत्रों के डीएफओ जंगल की सुरक्षा को छोड़कर देहरादून में जमे रहे।
2010-11 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत खिलाड़ियों की विशेष भर्ती की योजना बनाई
जब लगा कि मौजूदा वन कर्मियों के भरोसे पदक तालिका में ऊंचे पायदान पर पहुंचना मुश्किल है, तो वन मुख्यालय ने 2010-11 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत खिलाड़ियों की विशेष भर्ती की योजना बनाई।

सामान्य तौर वन विभाग में डीएफओ स्तर पर भर्ती होती थी, लेकिन यह विशेष अभियान था, इसके मद्देनजर तय हुआ कि डीएफओ देहरादून के तहत एकीकृत भर्ती की जाए। इसके लिए बाकायदा चयन कमेटी आदि बनाने की औपचारिकता पूरी की गई और आननफानन में करीब 22 खिलाड़ियों को भर्ती कर फारेस्ट गार्ड बना दिया गया।

यह मामला कई साल दबा रहा। इसी बीच सूचना का अधिकार के तहत स्पोर्ट्स कोटे के तहत भर्ती हुए खिलाड़ियों के शैक्षिक और खेल गतिविधियों के प्रमाण पत्र मांगे गए। इसके बाद खुलासा हुआ कि दो खिलाड़ियों के शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र संदिग्ध हैं। डीएफओ देहरादून पीके पात्रो के अनुसार कुछ तथ्य सामने आए थे। इसके बाद दो फॉरेस्ट गार्ड के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई है, जो फर्जी पाए गए हैं।

इन फॉरेस्ट गार्ड के संबंध में वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने के साथ ही आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। इन फॉरेस्ट गार्ड का वेतन रोक दिया गया गया है। अब बर्खास्तगी मुख्यालय स्तर से हो सकती है। प्रमुख वन संरक्षक (एचआरडी) मोनिष मल्लिक के अनुसार मामले में वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
स्पोर्ट्स कोटे के तहत फॉरेस्ट गार्डों के खूब ठाठ रहे हैं। इनको देहरादून वन प्रभाग के तहत भर्ती किया गया, लेकिन तैनात कुमाऊं के हल्द्वानी, तराई केंद्रीय और तराई पूर्वी वन प्रभाग में दी गई। ताकि उनको प्रशिक्षण, खेल गतिविधियों में शामिल होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए। खानपान से लेकर इनकी नौकरी में भी आराम और सुविधा का खास ख्याल रखा जाता है।

विजिलेंस जांच की नहीं जानकारी
वन विभाग में फॉरेस्ट गार्डों की भर्ती सवालों में रही है। इसमें राजाजी नेशनल पार्क आदि जगहों पर हुई भर्ती और अधिकारियों की भूमिका को लेकर आरोप लगते रहे हैं।

शासन ने 2010 के बाद प्रदेश के सभी वन प्रभागों में वन आरक्षियों की भर्ती की जांच विजिलेंस से कराने का फैसला किया। इसकी फाइल आदि बन गई है। हालांकि अभी वन महकमा ऐसी कोई भी जांच शुरू होने की बात से अनभिज्ञता जता रहा है।

प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र महाजन के अनुसार फिलहाल विजिलेंस जांच शुरू होने की जानकारी उन्हें नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगर विजिलेंस जांच शुरू होती है, तो प्रभागों से फारेस्ट गार्डों के प्रमाण पत्र आदि मांगे जाएंगे, अभी तक ऐसे भी कोई भी मांग विभाग के पास नहीं पहुंची है।

About admin