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हैकिंग करने की कोशिश से बन गए आज करोड़ो के मालिक

हैकिंग करने की कोशिश से बन गए आज करोड़ो के मालिक

देश का सबसे अच्छा दिमाग क्लास रूम के आखिरी बेंच पर भी मिल सकता है…! अब्दुल कलाम द्वारा कहीं गई ये पंक्तियां इस बात का सबूत है कि ये जरूरी नहीं कि हर एक टॉपर सफल होगा और ये भी जरूरी नहीं कि क्लास के आखिरी डेस्क पर बैठने वाला असफल होगा। इतिहास में ज्यादातर वो सफल हुए देखे गए हैं जिनमें प्रतिभा है जो कुछ नया कर सकते हैं जो कल्पनाशील है।

 

तृशनीत अरोड़ा उन्हीं में से एक है। कौन जानता था कि आठवीं फेल ये छात्र एक दिन भारत का साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बन जाएगा। तृशनीत की दिलचस्‍पी तकनीक, गेम और कंप्‍यूटर साइंस में बचपन से ही थी।

 

तृशनीत की कम्प्यूटर में इतनी रुचि थी कि सारा वक्त इसी में चला जाता, बाकी सब्जेक्ट्स की तैयारी के लिए उनके पास समय ही नहीं होता था और कंप्‍यूटर हैक करने की दीवानगी ने उन्हें 8वीं फेल तो करा दिया पर दुनिया में वो मकाम भी दिया जिसकी चाहत में लोग हाई एजुकेशन करते हैं।

 

बचपन में ही तृशनीत कम्प्यूटर में अपने शौक को ही करियर बनाने का फैसला कर चुके थे। आठवीं फेल होने के बाद घर वाले उनसे काफी नाराज हुए। लोगों ने उनका मजाक बनाया पर किसी बात का तृशनीत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

 

त्रिशनित ने 19 साल की उम्र में कंप्यूटर को ठीक और सॉफ्टवेयर क्लीन करना सीख लिया था, इस काम के लिए उसे पहली बार चेक मिला और इस रुपए से उन्होंने अपनी कंपनी खोली।

 

त्रिशनित अब तक CBI, पंजाब राज्य और क्राइम ब्रांच के लिए ट्रेनिंग सेशन कर चुके हैं, साथ ही रिलायंस से लेकर सरकारी ऑफिस तक उनके क्लाइंट की लिस्ट में शामिल हैं। उनका सपना एक दिन बिलियन डॉलर साइबर सिक्योरिटी कंपनी खोलने का है। त्रिशनित ‘हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा’ ‘दि हैकिंग एरा’ और ‘हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स’ जैसी किताबें लिख चुके हैं।

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