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    10वें डिफेंस एक्सपो: मेक इन इंडिया स्टॉल का मोदी ने किया इनॉगरेशन, 163 विदेशी फर्म ले रहीं हिस्सा

    10वें डिफेंस एक्सपो: मेक इन इंडिया स्टॉल का मोदी ने किया इनॉगरेशन, 163 विदेशी फर्म ले रहीं हिस्सा

    चेन्नई. डिफेंस एक्सपो में हिस्सा लेने नरेंद्र मोदी गुरुवार को चेन्नई पहुंचे। उन्होंने यहां मेक इन इंडिया स्टॉल का शुभारंभ किया। इस बार एक्सपो की थीम ‘भारत: रक्षा निर्माण में उभरता हुआ हब’ रखी गई है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, स्वीडन और फिनलैंड समेत 47 देशों की 163 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। 10 अप्रैल से शुरू हुआ यह एक्सपो 14 अप्रैल तक चलेगा। आखिरी दिन इसे आम लोगों के लिए खोला जाएगा।

    एयरपोर्ट के बाहर मोदी का विरोध

    – नरेंद्र मोदी के चेन्नई पहुंचने से पहले कावेरी जल विवाद को लेकर एयरपोर्ट के बाहर उनका विरोध भी किया गया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाने की कोशिश की।

    दुनिया को भारत में हो रहे रक्षा निर्माण की क्षमता दिखाना

    – रक्षा मंत्रालय के सचिव अजय कुमार ने बताया, “एक्सपो के जरिए हम दुनिया को भारत में हो रहे रक्षा निर्माण की क्षमता दिखाना चाहते हैं। हम रक्षा निर्माण में तेजी से बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि हमने बीते साल 55 हजार करोड़ रुपए के रक्षा उपकरणों का निर्माण किया। हम अपने प्रॉडक्ट को निर्यात करने की संभावनाएं भी टटोल रहे हैं।”

    एक्सपो में भारत की अब तक की सबसे ज्यादा फर्म

    – इस बार 701 कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें 539 भारतीय और 163 विदेशी फर्म हैं। अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा भारतीय फर्म हिस्सा ले रही हैं। जबकि विदेशी कंपनियों में 20% की कमी आई है। हालांकि अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस की टॉप डिफेंस कंपनियां हिस्सा ले रही है।

    गोवा से 25% बड़ा एक्सपो
    – एग्जीबीशन 2.9 लाख वर्ग फीट में हो रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा एक्सपो है। गोवा से 25% बड़ा है।

    लैंड, एयर और नेवल सिस्टम का डेमोस्ट्रेशन होगा
    – एक्सपो में भारत का लैंड, एयर और नेवल सिस्टम का लाइव डेमोस्ट्रेशन होगा। 155 एमएम एडवांस आर्टिलरी गन धनुष, तेजस जेट्स, अर्जुन मार्क-2 टैंक को भी प्रदर्शनी में रखा गया है। ब्रिज बनाने वाले टैंक (बीएटीज) भी शामिल किए गए हैं।

    70% जगह भारतीयों कंपनियों ने बुक कराई
    – एक्सपो में 70% स्पेस भारतीय फर्म के लिए है। इसमें 20% जगह एमएसएमई ने बुक की है।
    – भारतीय पैवेलियन 35 हजार वर्ग फीट में है। इसमें निजी और सार्वजनिक फर्म अपने प्रॉडक्ट दिखाएंगे।

    ये टॉप भारतीय फर्म
    – टाटा, एलएंडटी, कल्याणी, भारत फोर्ज, महिंद्रा, एमकेयू, डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, गोवा शिपयार्ड, हिंदुस्तान शिपयार्ड के अलावा आर्डिनेंस कंपनियों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया है।

    ये इंटरनेशनल कंपनियां
    – लॉकहीड मार्टिन, बोइंग (यूएस), साब (स्वीडन), एयरबस, राफैल (फ्रांस), रोसोनबोरान एक्सपोर्ट्स, यूनाइटेड शिपबिल्डिंग (रूस), बीएई सिस्टम्स (यूके), शिबत (इजरायल), वॉर्टशिला (फिनलैंड) जैसी बड़ी फर्म हिस्सा ले रही हैं।

    एक्सपो में 13 देशों ने भेजे मंत्री स्तर के डेलीगेट्स
    – 47 देशों के डेलीगेट्स आ रहे हैं। अमेरिका, यूके समेत 13 देशों के मंत्री स्तर के डेलीगेट्स पहुंचे हैं। कुछ देशों ने 10 से ज्यादा डेलीगेट्स का ग्रुप भेजा है।

    भारत 10 साल में रक्षा क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपए लगाएगा
    – भारतीय वायुसेना ने 110 फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने का एलान किया है। इस सौदे की लागत 78 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है। लिहाजा, दुनियाभर की ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री की इस एक्सपो पर नजर है।

    – साउथ एशिया सेंटर ऑफ अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन और बोइंग भारत में मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमआरसीए) एफ-16 और एफ/ए हॉर्नेंट जेट्स के लिए भारत में प्लांट लगाने की संभावना तलाश रही हैं।
    – इसके अलावा स्वीडन की साब और डसाल्ट एविएशन भी प्लांट लगाने पर विचार कर रही हैं। ये सभी फर्म इस एक्सपो में पहुंच रही हैं। इन्हें यहां बड़ा बाजार दिख रख रहा है। क्योंकि भारत 2032 तक अपना हवाई बेड़ा 30 से बढ़ाकर 42 करना चाहता है। इस दौरान भारत रक्षा उपकरण पर 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगा।

    1998 में भारत में पहली बार आया था कांसेप्ट
    – डिफेंस एक्सपो का कांसेप्ट 1998 में आया था। पहली बार भारत में 1999 में 197 कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया था।
    – रक्षा मंत्रालय और सीआईआई ने 1999 में पहले शो का आयोजन किया था। हालांकि, दुनिया के अन्य देशों में इसका चलन दूसरे विश्वयुद्ध के बाद तेजी से बढ़ा।

    – 2002 से ये हर दो साल पर हो रहा है। 2008 में 29 देशों की 447 फर्म पहुंची थीं। तब 208 भारतीय कंपनियों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया था।
    – 2016 में यह एक्सपो पहली बार दिल्ली के बाहर गोवा में हुआ। तब रिकॉर्ड 44 देशों की 843 फर्म ने रजिस्ट्रेशन कराया। 2018 में दूसरा मौका है, जब एक्सपो दिल्ली से बाहर हो रहा है।

    दुनिया में: विश्वयुद्ध के बाद एक्सपो का चलन, हर दसवें दिन एक एक्सपो, 130 लाख करोड़ का बिजनेस
    विश्व युद्ध के बाद दुनियाभर में डिफेंस एक्सपो का चलन बढ़ा। 1936 में मॉडर्नहिस्ट्री में स्टॉकहोम में एक्सपो लगा। इसमें 8 देशों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान एयरशो भी आयोजित किए गए। इससे पहले 1851 में पहला डिफेंस एक्सपो लगा था।
    – दुनिया में सालाना 37 डिफेंस एक्सपो होते हैं। यानी कहीं न कहीं हर 10वें दिन एक्सपो होता है।
    – आज दुनिया में डिफेंस कारोबार सबसे बड़ा है। दुनिया की डिफेंस इंडस्ट्री 130 लाख करोड़ रुपए की है।
    – दुनिया के सबसे बड़ेडिफेंस एक्सपो यूरोसटोरी का आयोजन फ्रांस में होता है। 2016 में 17.89 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में लगा था। 30 देशों की 1571 फर्म पहुंची थी।

    2016 में पहली बार दिल्ली के बाहर गोवा में हुआ ये एक्सपो
    – 1998 में पहली बार डिफेंस एक्सपो का कांसेप्ट आने के बाद इसमें हथियारों और सैन्य हार्डवेयर का बाजार लगता है। रक्षा मंत्रालय और सीआईआई ने 1999 में पहले शो का आयोजन किया था। तब 197 फर्म पहुंची थी। 2002 से ये हर दो साल पर हो रहा है।
    – 2008 में 29 देशों की 447 फर्म पहुंची थी। तब 208 भारतीय कंपनियों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया था।
    – 2016 में पहली बार दिल्ली के बाहर गोवा में हुआ। तब रिकॉर्ड 44 देशों की 843 फर्म ने रजिस्ट्रेशन कराया।
    – 2018 में दूसरा मौका है, जब एक्सपो दिल्ली से बाहर हो रहा है। चेन्नई में हो रहे इस एक्सपो में 701 फर्म हिस्सा ले रही हंै। इसमें 539 भारतीय और 163 विदेशी फर्म है।

     

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