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    500 गो-तस्करों की धरपकड़ में जुटी राजस्थान पुलिस, गठित की स्पेशल टास्क फोर्स

    500 गो-तस्करों की धरपकड़ में जुटी राजस्थान पुलिस, गठित की स्पेशल टास्क फोर्स

    जयपुर। उन्मादी हिंसा (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं से सवालों के घेरे में आई राजस्थान पुलिस अब हरकत में आ गई है। पुलिस ने अब गो-तस्करी रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के साथ ही गो-तस्करों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। फरार चल रहे गो-तस्करों को सूचीबद्ध कर उन्हें पकड़ा जाएगा। यह अभियान विशेष रूप से अलवर जिले में चलेगा।

    अलवर पुलिस फरार चल रहे करीब 500 गो-तस्करों की धरपकड़ में जुट गई है। अभियान के तहत अब तक दो दर्जन गो-तस्करों पर शिकंजा कसते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अलवर जिले में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने दोहरी रणनीति के तहत काम करना शुरू किया है।

    इसमें एक तरफ जहां गो-तस्करों की धरपकड़ की जा रही है, वहीं गो-रक्षक के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले कथित गो-रक्षकों को चिह्नित कर उन्हें पाबंद करने समेत अन्य कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

    अलवर में तीन साल में 410 से अधिक मामले-

    अलवर जिले में साल 2015 से अब तक गो-तस्करी के 410 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 610 गो-तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जिले में वर्ष 2015 में गो-तस्करी के 160 मामले दर्ज कर 226 गो-तस्करों को गिरफ्तार किया गया।

    साल 2016 में 117 मुकदमें दर्ज 248 गो-तस्करों को पकड़ा गया। वहीं, साल 2017 में 94 मुकदमे दर्ज कर 108 को दबोचा गया। साल 2018 में अगस्त माह तक गो-तस्करी के 41 मामले दर्ज हुए हैं, इनमें 28 गो-तस्करों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बावजूद अब भी पांच सौ अधिक गो-तस्कर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

    गृहमंत्री बोले-गुंड़ागर्दी बर्दास्त नहीं होगी-

    प्रदेश के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने एक बातचीत में कहा कि गो-रक्षा के नाम पर गुंड़ागर्दी बर्दास्त नहीं की जाएगी। गो-तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस को पहले से अधिक सजग रहने के लिए कहा गया है। फरार गो-तस्करों को तलाशने के साथ ही पड़ोसी राज्यों की भी इससे जुड़े मामलों में मदद ली जा रही है।

     

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