Wednesday , 18 July 2018
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    8 राज्यों के एटीएम में नकदी का संकट: 2000 रुपए के नोटों की कमी, जेटली ने किल्लत को अस्थायी बताया

    8 राज्यों के एटीएम में नकदी का संकट: 2000 रुपए के नोटों की कमी, जेटली ने किल्लत को अस्थायी बताया

    भोपाल/लखनऊ/अहमदाबाद/ पटना.उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में नकदी का संकट पैदा हो गया है। दिल्ली- एनसीआर, भोपाल, पटना, लखनऊ, हैदराबाद और अहमदाबाद समेत देश के कई इलाकों के एटीएम में पैसा नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। इस बीच, केंद्र सरकार ने कहा कि कुछ जगह कैश की कमी है। आरबीआई ने काम करना शुरू कर दिया है। दो दिन में यह परेशानी खत्म हो जाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे अस्थायी बताया है। एक बैंक अफसर का कहना है कि रिजर्व बैंक की ओर से नकदी का प्रवाह घटने की वजह से यह हालात पैदा हुए हैं। इसे दूर करने की कोशिश की जा रही है

    गुजरात, तेलंगाना में पहले से थी कैश की कमी

    पिछले कुछ हफ्ते से गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कैश में कमी बनी हुई थी। सोमवार को पूर्वी महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश से नकदी की कमी की शिकायतें मिलीं। मामला तब और बढ़ा जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बाजार से 2000 रुपए के नोट गायब हो रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे साजिश होने का आरोप लगाया है।

    नकदी की कमी की ये 2 वजह

    – पहली: परेशानी 2000 के नोट को लेकर है। बैंक अफसर का कहना है कि 2000 के नोट की जमाखोरी हो रही है। इस वजह से किल्लत बढ़ गई है। 2000 के नोट के सर्कुलेशन में कमी आई है। बैंक एटीएम में छोटे नोट डाल रहे हैं, जिससे उनमें कैश जल्दी खत्म हो जाता है। बता दें कि नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए थे। इसके बाद सरकार ने 500 रुपए और 2000 का नोट जारी किया था।

    – दूसरी: एक बैंक अफसर का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से डिपॉजिट में कमी आई है और पैसा ज्यादा निकला है।

    केंद्र सरकार ने कहा- दो दिन में खत्म हो जाएगी किल्लत

    – वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, “देश में नकदी के हालात की समीक्षा की जा चुकी है। कुल मिलाकर पर्याप्त नकदी चलन में है। बैंकों में पर्याप्त कैश है। कुछ जगहों पर कमी इसलिए हुई, क्योंकि कुछ जगहों पर मांग अचानक बढ़ी। इस पर जल्द ही नियंत्रण पाया जाएगा।”

    – केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने भी कहा – “अभी हमारे पास 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपए की कैश करंसी है। एक समस्या है कि कुछ राज्यों के पास कम करंसी है, जबकि अन्य राज्यों के पास ज्यादा। सरकार ने राज्य स्तर पर कमेटी बनाई है। वहीं, आरबीआई ने भी नोटों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए कमेटी बनाई है। कैश ट्रांसफर किया जा रहा है। यह परेशानी दो दिन में खत्म हो जाएगी।”

    शिवराज ने कहा था- लोग 2000 के नोट दबाकर रख रहे

    – मध्य प्रदेश के शाजापुर में किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा था, “नोटबंदी से पहले 15 लाख करोड़ रुपए की नकदी चलन में थी। इस प्रक्रिया (नोटबंदी) के बाद यह बढ़कर 16 लाख 50 हजार करोड़ रुपए हो गई, लेकिन बाजार से 2000 का नोट गायब हो रहा है। लेकिन दो-दो हजार के नोट कहां जा रहे हैं, कौन दबाकर रख रहा है, कौन नकदी की कमी पैदा कर रहा है। यह षड्यंत्र है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि दिक्कतें पैदा हों। सरकार इससे सख्ती से निपटेगी।”

    – शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने यह मुद्दा केंद्र सरकार के सामने भी उठाया है।

    हैदराबाद के कई एटीएम खाली

    – न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, हैदराबाद में लोगों ने एटीएम में पैसा न होने की शिकायत की है। कुछ लोगों ने बताया कि हम शहर के कई इलाकों के एटीएम में गए, लेकिन किसी में भी पैसा नहीं मिला।

    बिहार-झारखंड में बैंक चेस्ट में कैपेसिटी से 80% कम नकदी

    – बिहार कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने नकदी की कमी के लिए मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
    – उन्होंने कहा कि बिहार-झारखंड में स्टेट बैंक के 110 करेंसी चेस्ट हैं, जिनकी क्षमता 12 हजार करोड़ रुपए की है, लेकिन यहां नकदी की उपलब्धता सिर्फ ढाई हजार करोड़ रुपए ही है। यानी कैपेसिटी से 80% कम नोट हैं।
    – सिंह ने कहा कि मार्च 2018 में करेंसी चेस्टों की बैलेंस शीट के मुताबिक, बैंकों में 2000 रुपए के नोटों की संख्या कुल रकम का औसतन 10% ही रह गई है, जबकि कुल नकदी में इनकी 50% हिस्सेदारी है।

    गुजरात में भी नकदी की दिक्कत
    – उधर, न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गुजरात में भी बैंकों में नकदी की किल्लत हो रही है। करीब 10 दिन पहले यह परेशानी उत्तर गुजरात से शुरू हुई, लेकिन अब पूरे राज्य में इसका असर है। यहां तक कि बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है। ज्यादातर एटीएम में पैसा नहीं है। शादी और किसानों को फसल के भुगतान का वक्त होने की वजह से लोगों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    नोटबंदी के बाद 99% करंसी चलन में लौटी, फिर भी संकट

    साल चलन में मौजूद नोटों का मूल्य
    7 नवंबर 2016 17.97 लाख करोड़ रुपए
    6 जनवरी 2017 8.98 लाख करोड़ रुपए
    16 फरवरी 2018 17.78 लाख करोड़ रुपए

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