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    दीपावली पर कब क्या करें, ये रहे पांचों दिन के मुहूर्त और वकत

    दीपावली पर कब क्या करें, ये रहे पांचों दिन के मुहूर्त और वकत

    इस बार दिवाली महालक्ष्मी पद्मयोग में मनेगी । दिवाली को सूर्य और बुध की युति बनने से बुधादित्य योग बना है। बुधादित्य को राजयोग का कारक माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्य से सिद्धि प्राप्ते होती है। दिवाली को सूर्य और बुध की युति बनने से बुधादित्य योग बना है।

    यह स्थिति आमजनों व व्यापारियों के लिए विशेष लाभदायक है। धन की देवी महालक्ष्मी का पूजन दिवाली पर सुख-समृद्धि और वैभव प्रदान करने वाले बुधादित्य योग में होगा।

    दिवाली पर बन रहा योग जनसामान्य को विशेष फल प्रदान करेगा। दिवाली की पूजा स्वाति नक्षत्र में होगी। इसका स्वामी राहू है जो कि सिद्धि देने वाला होता है। महालक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त सभी वर्ग के लिये अलग अलग रहेंगे।

    ये हैं मुहूर्त

    कृषक वर्ग के लिये महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

    प्रात: 9 बजकर से 12 बजकर मिनट तक लाभ अमृत का चौघड़िया रहेगा तथा प्रात: वृश्चिक स्थिर लग्न 7:46 से 10:02 तक रहेगी

    कर्मचारी(सभी प्रकार की नौकरी करने वालों के लिये)के लिये मुहूर्त-कुम्भ लग्न– दोपहर में 1 बजकर55 मिनट से दोपहर 3:28 बजे तक रहेगा । दोपहर में 1:30 बजकर 3 बजे तक तक शुभ का चौघड़िया रहेगा।

    व्यापारी व सभी व अन्य सभी गृहस्थों के लिये महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त-वृषभ लग्न शाम को 6:39 बजे से 8 बजकर 37 मिनट तक व सायं 5 वजकर 5 मिनट से रात्रि 7 बजकर 30 मिनट तक प्रदोष काल में पूजन कार्य शुभ रहेगा व शाम को 6 से 9 बजकर शुभ व अमृत रहेगा व 9 से 10:30 तक चर !

    व्यापारी व तांत्रिक साधना के लिये शुभ मुहूर्त

    निशिथ काल– रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

    सिंह लग्न-मध्यरात्रि (अर्धरात्रि) में 1:30बजकर 3 बजे तक रहेगा।

    ऐसा होगा पांच दिनी पर्व

    धनतेरस

    28 अक्टूबर शुक्रवार को धन के देवता कुबेर के पूजन के साथ पांच दिनी पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन मंगलकारी मुहूर्त में जमकर खरीदारी होगी।

    रूप चौदस

    29 अक्टूबर शनि वार को दीप दान के साथ रूप निखारने का पर्व रूप चौदस हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।

    श्री महालक्ष्मी पूजन

    30 अक्टूबर रविवार को दीपावली पर धन की देवी लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। घर आंगन में दीप सज्जा कर जमकर आतिशबाजी की जाएगी।

    दिवाली के दिव्य मुहूर्त

    शुभ मुहूर्त

    चौघड़िया से

    प्रातः 07.55 मि. से 09.19 मि. तक (चर)

    प्रातः 09.20 मि. से 10.43 मि. तक (लाभ)

    प्रातः 10.44 मि. से दोप. 12.07 मि. तक (अमृत)

    दोप. 01.31 मि. से 02.56 मि. तक (शुभ)

    शाम 05.44 मि. से 07.20 मि. तक (शुभ)

    शाम 07.21 मि. से रात्रि 08.56 मि. तक (अमृत)

    रात्रि 08.57 मि. से 10.32 मि. तक (चर)

    अर्धरात्रि 01.44 मि. से 03.20 मि. तक (लाभ)

    लग्न से

    वृश्चिक लग्न

    प्रातः 07.50.41 से 10.06.28 तक

    (लग्न नवांश-प्रातः 08.51 मि. से 09.06 मि. तक)

    कुम्भ लग्न

    दोप. 01.58.43 से 03.32.02 तक

    (लग्न नवांश-दोप. 02.41 मि. से 02.51 मि. तक)

    वृषभ लग्न

    शाम 06.43.26 से रात्रि 08.41.41 तक

    (लग्न नवांश-रात्रि 07.33 मि. से 07.46 मि. तक)

    सिंह लग्न

    अर्धरात्रि 01.10.48 से 03.22.14 तक

    (लग्न नवांश-अर्धरात्रि 02.09 मि. से 02.24 मि. तक)

    प्रदोषकाल से

    शाम 05.44.07 से 07.52.09 तक

    महानिशीथ काल से

    अर्धरात्रि 11.44.13 से 12.32.13 तक

    गोवर्धन पूजा

    31 अक्टूबर सोमवार को गोवर्धन के साथ पशुधन की पूजा भी की जाएगी। स्नेहीजन एक-दूसरे को पर्व की बधाई देंगे।

    भाई दूज

    1 नवंबर मंगलवार को भाई दूज व चित्रगुप्तब पूजन- भाई और बहन के स्नेह का पर्व भाई दूज मनाया जाएगा। इस दिन बहन भाई की आरती उतारकर तिलक करेगी।

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